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मध्यप्रदेश बेलगाम नोकरशाही बदनाम होती सरकार

भोपाल। सीएम शिवराज सिंह चौहान ने बड़े ही धूमधाम के साथ सीएम हेल्पलाइन की शुरूआत की थी। भरोसा दिलाया था कि लोगों को अपनी समस्याओं के निराकरण के लिए सरकारी अधिकारियों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे परंतु हालात यह है कि अब 3 लाख से ज्यादा शिकायतें लंबित हैं। अधिकारी ध्यान ही नहीं दे रहे। चुनावी साल है और लोग इस लापरवाही के लिए शिवराज सरकार से नाराज हैं। खबर आ रही है कि सीएम शिवराज सिंह चौहान की सरकार विधानसभा चुनाव से पहले इन तीन लाख शिकायतों पर फीडबैक लेकर उनका निराकरण करने के मूड में दिख रही है। इसी के चलते शिकायतों पर फीडबैक लेने का काम निजी कंपनी आउट बाउंड कॉल सेंटर के माध्यम किया जाएगा। अब तक सीएम हेल्पलाइन में शिकायत दर्ज करने वाली कंपनी ही फीडबैक लेती थी।
मध्यप्रदेश में सीएम हेल्पलाइन में 181 पर कॉल सेंटर में शिकायत दर्ज कराई जाती है। वर्तमान में सीएम हेल्पलाइन श्योरविन कंपनी का कॉल सेंटर संभालती है। कॉल सेंटर में कंपनी के तकरीबन 460 कर्मचारी प्रदेशभर से आने वालीं शिकायतें दर्ज करते हैं। इन्हें 21 हजार रुपए का प्रति सीट भुगतान होता है। शिकायतें सुनने के लिए कंपनी को प्रति माह करीब एक करोड़ रुपए का भुगतान हो रहा है। कंपनी के जिम्मे शिकायतों की सुनवाई के बाद फीडबैक का जिम्मा भी रहता है।
कई विभागों से ये शिकायतें लगातार आ रही हैं कि निराकृत होने के बाद भी शिकायतें पेंडिंग रहती हैं तो कई मामलों में समस्या दूर नहीं होने के बावजूद उसे भी निराकृत बता दिया जाता है, जिसके चलते शिकायतकर्ता उसे दोबारा दर्ज कराते हैं। यही कारण है कि शिकायतों की पेंडेंसी लगातार बढ़ती जा रही है।

 

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