25 मार्च को पूरे देश में राम का जन्मोत्सव(श्रीरामनवमी) का पावन पर्व बड़ी धूमधाम से मनाया गया. पूरे देश में जगह जगह पर शोभायायात्रायें, भगवा रैली आदि निकाली गईं जिसमें भगवा झंडे तथा जयश्रीराम के नारों से पूरा देश गुंजायमान हो उठा लेकिन देश में कुछ ऐसे लोग भी निकले जिन्हें श्रीराम रास न आये, जिनसे हिन्दुओं की ये खुशी बर्दाश्त न हुई, जिन्हें हिन्दू समाज को इस तरह धूमधाम से अपना त्यौहार मनाते हुए देखना हजम नहीं हुआ और उन्होंने कई जगह इन यात्राओं पर हमला किया जिसमें सेकड़ों लोग घायल हो गये.
गौरतलब है की पश्चिम बंगाल में भी कई जगह श्रीरामनवमी की शोभायात्रा निकाली जा रही थी. लेकिन अचानक से वही हुआ जिसका डर था. कुछ मजहबी उन्मादी सोच से ग्रसित लोगों ने शोभायात्रा को रोक दिया. लेकिन हिन्दू समाज के लोगों ने उन्हें समझाया कि ये हमारा त्यौहार है इससे आपको कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए लेकिन कट्टरपंथियों को ये पसंद न आया और उन्होंने यात्रा पर हमला कर दिया. यात्रा को लेकर पश्चिम बर्दवान जिले के रानीगंज एवं मुर्शिदाबाद जिले के कांदी में हिंसक झड़प हुई. रानीगंज में यात्रा पर आक्रान्ताओं ने बम फेंक दिया जिसके फटने से दुर्गापुर-आसनसोल पुलिस कमिश्ररेट के एडीसीपी अरिन्दम दत्ता चौधरी और कुछ पुलिसकर्मी समेत 50 से अधिक लोग घायल हो गए. अरिंदम चौधरी का दाहिना हाथ बम से पूरी तरह से उड़ गया है. उनको गंभीर हालात में अस्पताल में भर्ती कराया गया है.
श्रीरामनवमी पर पश्चिम बंगाल में जिस तरह की घटनाएँ हुई हैं, शोभायात्रा पर हमले हुए हैं, पुलिस टीम पर हमला हुआ है उससे लगता है जैसे पश्चिम बंगाल हिन्दुस्तान का हिस्सा नहीं हैं? आखिर ममता बनर्जी पश्चिम बंगाल को कहाँ ले जाना चाहती हैं? आखिर क्यों बंगाल में हिन्दू समाज अपने त्यौहार तक नहीं मना सकता है? ममता बनर्जी के शासन में पश्चिम बंगाल में हिन्दू होना गुनाह हो गया है जहाँ आये दिन हिंदुत्व पर हमला होता है, हिन्दुओं का दमन होता है. निश्चित रूप से ये स्थिति काफी भयावह है तथा पश्चिम बंगाल नया कश्मीर बनने की राह पर है. और भविष्य में ऐसी घटनाएँ न हों. हिन्दुस्तान की सभ्यता, संस्कृति बनी रहे तो इसके लिए जरूरी है कि देश में सख्त कानून लाया जाये.
