भक्तों के सौभाग्य और श्री हनुमान जी की कृपा से आज हनुमान जन्मोत्सव का शुभ प्रसंग मंगलवार को ही पड़ रहा है । मंगलवार हनुमान जी को सर्वाधिक प्रिय है। आज हनुमान जयंती मंगलवार को अगर किसी कारणवश हनुमान मंदिर न जा सकें तो घर पर ही हनुमान जी की प्रतिमा स्थापित कर पूजन प्रारम्भ करें। कोशिश करें, संकल्प बीच में खण्डित न हो, पूजा अपनी सुविधा के अनुसार ही मंदिर में अथवा घर पर श्रद्धाभाव से करनी चाहिए।
मंत्र – ॐ हनुमन्ते नमः मंत्र का अधिक से अधिक जप करें, साथ ही सुन्दरकाण्ड, हनुमान चालीसा, बजरंग बाण, हनुमानाष्टक का भी विधिवत पाठ अपनी सुविधा अनुसार करें।
प्रसाद – पूजन के पश्चात् हनुमान मंदिर में अथवा अपने घर के पूजा स्थल पर प्रसाद चढ़ाकर, प्रसाद को अधिक से अधिक बांटने का प्रयास करें। यदि मंदिर में प्रसाद चढ़ाकर बांटें, तो घर पर सिर्फ थोड़ा सा ही प्रसाद लाऐं ताकि घर के सदस्यों को दिया जा सके। जितना अधिक प्रसाद बाटेंगे, उतना कल्याण हनुमत कृपा से शीघ्र होने लगेगा।
दान से लाभ – अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य अनुसार हनुमान जन्मोत्सव, से जप, पूजा आदि प्रारम्भ करें तथा गरीब, असहाय लोगों में प्रत्येक मंगलवार लाल रंग की वस्तु जैसे अंगोछा आदि का दान करें। 18 मंगलवार दान करना अनिवार्य है। धर्मशास्त्रों के अनुसार छोटे से छोटा दान भी बहुत महत्व रखता है। दान करते समय ऐसा न सोचें कि ‘हम तो बहुत गरीब हैं, बड़ा दान नहीं कर सकते हैं।’ याद रखिए पूजा, पाठ, दान आदि करते समय आपकी भावना का ही विशेष महत्व है।
श्री हनुमान जी की पूजा जीवन में अद्भुत परिवर्तन ला सकती है। हनुमत कृपा से संकट से मुक्ति पाना हो, तो श्री हनुमान जी महाराज की उपासना मनसा, वाचा, कर्मणा से होनी चाहिए, अर्थात् सच्चे व निर्मल मन एवं वचनों से जो भी भक्त श्री हनुमान जी की भक्ति करते हैं, उनके सभी संकट श्री हनुमान जी हर लेते हैं। ज्योतिष विज्ञान मानता है कि हनुमान जी ग्रहों के बुरे प्रभाव से मनुष्य की रक्षा करते हैं। हनुमान जी की पूजा शुद्ध आचरण रखकर मन, क्रम, वचन से करने से हनुमान जी की दिव्य शक्ति भक्त में संचारित हो जाती है।
हनुमत शक्ति का प्रताप
महाभारत में एक प्रसंग आता है कि कर्ण के साथ युद्ध करते समय अर्जुन को यह दम्भ हो गया कि अर्जुन के बाणों की शक्ति के कारण कर्ण का रथ दूर तक पीछे हट जाता है और जब कर्ण अर्जुन के रथ के उपर बाणों का प्रहार करता है, तब अर्जुन का रथ अपने स्थान से बहुत कम दूर ही पीछे हटता है, जिसके कारण अर्जुन को घमण्ड हो गया और वह अपने आप को महान पराक्रमी समझने लगा। अर्जुन की मनोदशा देखकर भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को समझाया कि, ऐसा, अर्जुन के रथ पर लगे झण्डे पर साक्षात विराजमान हनुमान जी की शक्ति के कारण हो रहा है। स्वयं हनुमान जी अर्जुन के रथ की रक्षा कर रहे हैं परन्तु अर्दश्य रूप में विराजमान हनुमान जी को न देख पाने के कारण अर्जुन का मन शंकालू हो उठा। अतः श्रीकृष्ण ने अर्जुन का संदेह दूर करने के लिए हनुमान जी से रथ से उतरने का आग्रह किया। जैसे ही हनुमान जी रथ से नीचे उतरे, वैसे ही कर्ण के बाण से अर्जुन का रथ कई गुना पीछे चला गया, तब अर्जुन को एहसास हुआ, कि यह सब हनुमान जी की शक्ति और क्षमता के कारण हो रहा था। बिन देखे ईश्वर पर विश्वास करने से अध्यात्मिक शक्तियां जागृत होती हैं जो मनुष्य की रक्षा करती हैं। हनुमान जी सर्वप्रथम अपने भक्त के अन्दर निवास कर रही कुमति का निवारण करते हैं, तत्पश्चात् भक्त को सुमति के रथ पर बैठाकर स्वयं भक्त के साथ-साथ चलते हैं। इस संसार में जितने भी दुर्लभ कार्य हैं, वे सब हनुमान जी की कृपा मात्र से ही सुगम व सरल हो जाते हैं।