Homeप्रमुख खबरेंकुर्सी छोड़ने को लेकर आखिर क्यों बरपा है हंगामा ?

कुर्सी छोड़ने को लेकर आखिर क्यों बरपा है हंगामा ?

प्रवीण दुबे

 

झाबुआ में एक कार्यक्रम में सीएम शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि दुनिया में कुछ भी परमानेंट नहीं है. कुर्सी की तरफ इशारा करते हुए सीएम शिवराज बोले, मैं तो जा रहा हूं सीएम की कुर्सी पर कोई भी बैठ सकता है.

 

राजनीति में कुर्सी सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती हैं कोई भी राजनेता कुछ भी छोड़ने को तैयार हो सकता है लेकिन कुर्सी वह किसी भी कीमत पर नहीं छोड़ना चाहता ऐसी स्थिति में जब किसी सूबे के मुख्यमंत्री एक सार्वजनिक कार्यक्रम में अपनी कुर्सी किसी दूसरे के लिए छोड़ने की बात कहता है वह भी तब जब उस सूबे में चंद महीनो बाद चुनावी बिगुल बजने वाला हो तो देश का मीडिया हो या राजनीति में थोड़ी सी भी रूचि रखने वाला कोई शख्स इस बात के निहितार्थ तो निकालेगा ही,  और कल जब से झाबुआ में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह द्वारा यह बयान सामने आया है कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिल रहा है । अब चाहे खुद शिवराज हों या फिर इस बयान के बाद खाली कुर्सी के प्रबल दावेदार के रूप में उभरे कैलाश विजयवर्गीय कितनी ही सफाई दें लेकिन कोई  मानने को तैयार नहीं है। 

शिवराज सिंह के इस बयान को लेकर जो बवाल मचा है उसके कुछ विशेष कारणों पर भी निहितार्थ निकालने वालों की पैनी निगाह है। पहली बात तो यह कि जिस झाबुआ के कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कुर्सी छोड़ने की बात कही उसमें शामिल होने वे सीधे दिल्ली से अमित शाह और मोदी से आपात बैठक करके यहां पहुंचे थे। ऐसी स्थिति में बयान को गम्भीरता से लिया गया मीडिया सहित तमाम राजनीतिक पंडितों को ऐसा लगा कि दिल्ली से सीधे कार्यक्रम में आए मुख्यमंत्री ने यह बयान इस कारण दिया क्यों कि उन्हें पार्टी हाईकमान ने कुर्सी छोड़ने के संकेत दे दिए हैं। यही बात मुख्यमंत्री के मुंह से भी निकल गयी।

दूसरा कारण यह रहा कि अमित शाह के मध्यप्रदेश प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री बदलने के कयास मीडिया व राजनीतिक विश्लेषकों ने लगा लिए। एक अन्य बात भी मीडिया में कई दिन से चर्चा में है कि आरक्षण को लेकर दिए एक बयान को लेकर प्रदेश की जनता का एक वर्ग मुख्यमंत्री से खासा नाराज है यही वजह है कि पार्टी हाईकमान उनकी जगह किसी अन्य चेहरे पर दांव लगाने पर विचार कर रहा है। 

मीडिया में ऐसी खबरें भी सामने आती रही हैं कि संघ और पार्टी द्वारा अपने स्तर पर कराये सर्वे में इस बार पार्टी के लिए मुश्किलें बढ़ सकनें वाले तथ्य सामने आए हैं। कुल मिलाकर इन सारी बातों के बीच शिवराज ने जब खुद किसी और के लिए कुर्सी छोड़ने वाला बयान दिया और कार्यक्रम के बीच से ही उठ कर चले गए तो अब इसको लेकर माहौल गर्माया हुआ है।

लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि चुनाव से चंद महीने पहले पार्टी शिवराज को हटाने की इतनी बड़ी रिस्क लेगी?

एक अन्य सवाल यह है कि शिवराज की जगह पार्टी में इतना लोकप्रिय ओर सर्वमान्य नेता दूसरा कौन है जो शिवराज की खाली कुर्सी को भर कर चुनाव में भाजपा को जीत दिला पायेगा? इस दृष्टि से विचार करें तो ऐसा चमत्कारी नेता फिलहाल नजर नहीं आता हां अगर पार्टी ने चेहरा बदलने का मन बना ही लिया है जिसकी की सम्भावना बेहद कम है तो फिर इस दौड़ में कई नाम लिए जा सकते हैं जैसे कि उमाभारती, कैलाश विजयवर्गीय या फिर संघ की पसंद के रूप में कोई बिल्कुल चमत्कृत कर देने वाला नाम भी सामने आ सकता है। खैर यह सब कयास हैं फिलहाल इससे सच्चाई कोसों दूर है। लेकिन चुनाव से पूर्व इस तरह की ऊहापोह की स्थिति व चर्चायें अच्छी नहीं कही जा सकती पार्टी शीर्ष नेतृत्व को शीघ्र इस बारे में बयान देकर स्थिति स्प्ष्ट करना चाहिए।

RELATED ARTICLES

Most Popular

Recent Comments