प्रवीण दुबे
यह बेहद खुशी की बात है कि ग्वालियर में14 वर्ष बाद कोई अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैच आयोजित किए जाने की घोषणा भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने की है। यह मैच बांग्लादेश की क्रिकेट टीम के साथ 6 अक्टूबर को ग्वालियर के नवनिर्मित माधवराव सिंधिया क्रिकेट स्टेडियम में खेला जाना है। इसको लेकर एक तरफ ग्वालियर की सिंधिया ब्रिगेड फूली नहीं समा रही है वहीं दूसरी ओर देश के कट्टर हिंदूवादी राजनीतिक दल में शुमार हिन्दू महासभा की ग्वालियर इकाई ने बांग्लादेश टीम का विरोध शुरू कर दिया है

उनका कहना है कि बांग्लादेश में हिन्दुओं के कत्लेआम और मंदिरों में तोड़फोड़ के बाद उस देश के साथ ग्वालियर की धरती पर क्रिकेट मैच का आयोजन कतई बर्दाश्त नहीं किया जा सकता उन्होंने यहां तक धमकी दी है कि यदि यह मैच स्थगित नहीं किया गया तो वह बांग्लादेश टीम पर कालिख पोतेंगे तथा पिच को भी क्षतिग्रस्त कर देंगे। गौरतलब है कि यह कोई पहला मौका नहीं है जब देश में विविध कारणों के चलते विदेशी टीमों का विरोध किया गया है। पूर्व में शिवसैनिकों ने 1 अक्टूबर 1991 को पाकिस्तान-भारत के बीच मैच रोकने के लिए मुंबई के वानखेडे स्टेडियम की पिच खोद दी थी। इसकी वजब से पूरी सीरीज़ ही रद्द हो गई थी।
1998 में महाराष्ट्र में बीजेपी और शिवसेना की गठबंदन सरकार थी। भारत-पाक मैच को लेकर दोनों में मतभेद हो गए थे। शिवसेना मैच के खिलाफ़ थी जबकि बीजेपी के उप मुख्यमंत्री स्वर्गीय गोपीनाथ मुंडे चाहते थे कि मैच हो। शिवसेना के मुख्यमंत्री मनोहर जोशी ने सिवसेना सुप्रीमो बालासाहब ठाकरे के आदेश का पालन करते हुए मैच रद्द कर दिया।
ग्वालियर की ही बात करें तो यहां भी पूर्व में इसी हिंदू महासभा ने पाकिस्तान टीम के खिलाफ उग्र प्रदर्शन करते हुए उनको काले झंडे दिखाकर जिस बस में वो बैठे थे उसपर कालिख पोत दी थी।
इस बात से कतई इंकार नहीं किया जा सकता है कि बांग्लादेश में हिन्दुओं के साथ जो कुछ घटित हो रहा है उसको लेकर भारत में जबरदस्त रोष व्याप्त है प्रधानमंत्री मोदी ने भी स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले से दिए अपने संबोधन में इसपर चिंता व्यक्त की है और वहां की सरकार से हिंदुओं की सुरक्षा करने को कहा है।
ऐसे हालात में बांग्लादेश क्रिकेट टीम की भारत में सुरक्षा एक बड़ा मुद्दा है ग्वालियर ही नहीं अन्य स्थानों पर जहां भी मैच प्रस्तावित हैं बांग्लादेश टीम को सुरक्षित मैदान तक ले जाना और बाद में विदा करने तक की जिम्मेदारी एक बड़ी चुनौती कही जा सकती है ।

फिलहाल भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने बांग्लादेश के साथ आयोजित होने वाली सीरीज का पूरा टाइम टेबल घोषित कर दिया है। इसके मुताबिक बांग्लादेश क्रिकेट टीम 19 सितंबर से 9 अक्टूबर तक भारत में रहने वाली है इस दौरान वह चेन्नई और कानपुर में दो टैस्ट मैच खेलने के अलावा ग्वालियर,दिल्ली हैदराबाद में तीन टी20 मुकाबलों में भारत के सामने खेलेगी।
देखना होगा कि भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के इस आयोजन को लेकर भारत सरकार का रवैया क्या रहने वाला है ? यदि बांग्लादेश में हालत सामान्य नहीं होते हैं और वहां हिंदुओं के खिलाफ जारी हिंसाचार बंद नहीं होता है तो निश्चित ही बांग्लादेश की टीम का भारत में क्रिकेट खेलने को हरी झंडी देना बेहद चुनौतीपूर्ण होगा और भारत सरकार इस चुनौती को स्वीकार करेगी या इस दौरे को टालने के लिए कहेगी इस बारे में अभी कहना मुश्किल है।
लेकिन ग्वालियर में बांग्लादेश दौरे के शुरुआत में ही उग्र हिंदुत्ववादी राजनीतिक दल ने जिस प्रकार धमकी दी है उसने इस क्रिकेट सीरिज को लेकर इस बात के संकेत तो दे ही दिए हैं रास्ता आसान नहीं है इस बात पर भी पैनी नजर रहेगी कि फिलहाल एक राजनीतिक दल ने इस मैच के खिलाफ मोर्चा खोला है यदि इस अभियान को कितना जनसहयोग मिलता है यदि इस विरोध के समर्थन में जनता उतरती है तो मैच के रद्द होने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है।