केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अपने पिता स्व माधवराव सिंधिया की पुण्यतिथि पर आज अपने सोशल मीडिया एकाउंट पर भावुक कर देने वाली पोस्ट साझा करते हुए लिखा
मेरे आदर्श, मेरे प्रेरणास्रोत, मेरी ताकत!पिताजी की पुण्यतिथि पर उन्हें शत-शत नमन। उनका जीवन सदैव मुझे जनसेवा के पथ पर चलने के लिए प्रेरित करता रहेगा।
इसके साथ ज्योतिरादित्य सिंधिया ने पिता से जुड़ी अपने बचपन की यादों की स्मृतियों वाला एक चित्र भी साझा किया जिसमें माधवराव बहुत छोटे और क्यूट से दिख रहे ज्योतिरादित्य सिंधिया के गले में हाथ डाले खड़े हुए हैं।
उल्लेखनीय है कर स्व माधवराव जीवाजीराव सिंधिया , सिंधिया ब्रिटिश राज के दौरान ग्वालियर रियासत के अंतिम शासक महाराजा जीवाजीराव सिंधिया के पुत्र थे 1961 में अपने पिता की मृत्यु के बाद ग्वालियर के महाराजा बनें. वह 1971 तक राजा रहे
वे एक भारतीय राजनीतिज्ञ और भारत सरकार में मंत्री थे. वह भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी के सदस्य थे.
माधवराव सिंधिया का जन्म 10 मार्च 1945 को एक शाही मराठा परिवार में ग्वालियर के अंतिम शासक महाराजा जीवाजीराव सिंधिया के यहां हुआ था़ उन्होंने सिंधिया स्कूल, ग्वालियर में अपनी स्कूली शिक्षा पूरी की और उसके बाद विनचेस्टर कॉलेज और न्यू कॉलेज, ऑक्सफोर्ड में उच्च शिक्षा हासिल की
यूके से लौटने के बाद सिंधिया ने राजनीतिक परंपरा का पालन करते हुए राजनीति में शामिल हो गए. उनकी मां विजया राजे सिंधिया ने उन्हें भारतीय जनसंघ के टिकट पर 1971 में ग्वालियर से लोकसभा के लिए चुना
माधवराव सिंधिया की मृत्यु 56 वर्ष की आयु में 30 सितंबर 2001 को उत्तर प्रदेश के मैनपुरी जिले के बाहरी इलाके मोट्टा गांव में एक विमान दुर्घटना में हुई थी. विमान में आग लगने से उसमें सवार आठ लोगों की मौत हो गई थी सिंधिया शव को एम्स नई दिल्ली में प्रोफेसर टी डी डोगरा ने परीक्षण किया और अन्य कानूनी औपचारिकताएं पूरी की गई. उस वक्त उनके पुत्र ज्योतिरादित्य माधवराव सिंधिया को प्रतीकात्मक रूप से परिवार का मुखिया नियुक्त किया गया था।
स्व माधव राव सिंधिया के प्रति ग्वालियर अंचल वासियों का बेहद लगाव रहा। श्री सिंधिया के केंद्रीय मंत्री रहते ग्वालियर को विकास की कई सौगातें मिली। यही वजह है कि ग्वालियर में उनको विकास का पर्याय माना जाता रहा।