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चार घंटे का मैच चार दिन की आवभगत

प्रवीण दुबे

 

चार घंटे का मैच चार दिन की आवभगत

 

विरोध करने वाले अभी इस बात को ही लेकर परेशान हैं कि ग्वालियर में बांग्लादेश के साथ मैच क्यों खेला जा रहा है लेकिन अब जो नई बात पता चली है उससे तो इन विरोधियों का पारा सातवें आसमान पर पहुंच सकता है  हिन्दुओं को निशाना बनाने वाले देश की क्रिकेट टीम की जोरदार आवभगत की तैयारी  चेन्नई और कानपुर  की तर्ज पर अब ग्वालियर में पूरी कर ली गई है आलीशान होटल में बिरयानी से लेकर तमाम लजीज भोजन इन्हें परोसा जायेगा और यह सबकुछ चलेगा तीन दिन यानि 4 घंटे का मैच और चार दिन की आवभगत ठीक वैसे ही जैसे चेन्नई और कानपुर में दिखाई दिया।

दिल्ली के एक फोन ने बिगाड़ा सारा गणित

मध्यप्रदेश की नौकरशाही के केप्टन बनने को लेकर दो साहिबान के बीच ऐसा जबरदस्त मुकाबला देखने को मिला कि जिसने किसी  हाई सस्पेंस वाली बॉलीवुड मूवी को भी पीछे छोड़ दिया। अब यह बात समझ नहीं आ रही कि एमपी की पसंद को दिल्ली ने नापसंद क्यों कर दिया ? आखिर वो कौन था जिसके सामने मध्यप्रदेश की पसंद धरी की धरी रह गई और बाजी मारी एक ऐसे साहिबान ने जिनकी लंबे समय तक दिल्ली में  जोरदार घुसपैठ रही है। सुनने में यह भी आ रहा है कि एन समय पर जो नाम सामने आया उसके पीछे दिल्ली ही नहीं ग्वालियर से होकर नागपुर तक जाने वाली लॉबी का भी बड़ा हाथ रहा है,वैसे बता दें कि इससे ग्वालियर में लंबी पारी खेल चुके एक अफसरान रिश्तेदार की नियुक्ति से फूले नहीं शमा रहे हैं।

वाट्सअप वाट्सअप से बेवकूफ बनाने का खेल

हमने अपने बचपन में कई तरह के खेल खेले होंगे जैसे कि चोर सिपाही,गुल्ली डंडा आदि लेकिन मध्यप्रदेश में कलेक्टर कमिश्नर आदि की कुर्सी सुशोभित करने वालों ने आजकल एक नए खेल वॉट्सएप वाट्सअप की शुरुआत की है। उच्च नौकरशाही के बीच यह खेल इतना लोकप्रिय हो चला है कि प्रदेश के मुखिया भी इस खेल में उलझकर वाह वाह के कशीदे पढ़ते दिखाई देते हैं। मुख्य बात यह है कि इस खेल में शारीरिक भागदौड़ की जगह पूरी तरह दिमाग लगाकर खेला जाता है। दिमाग लगाओ और उस स्थान पर पहुंच जाओ जहां यह खेल खेलना है कुछ एक्शन पोज दो फोटो खिंचवाओ बाकी काम जनसंपर्क विभाग पूरा कर देगा साहब की एक्शन युक्त फोटो समाचारों के साथ वाट्सअप पर पहुंचा दी जाएंगी ऐसा लगेगा मानो साहब लोग जनता की समस्याएं दूर करने रात दिन एक किए हुए हैं। लेकिन सत्यता इससे कोसों दूर होती है। प्रदेश के मुखिया और उनकी काबीना की कमजोरी यह है वो गाड़ी से उतरकर कभी मौके पर जाते ही नहीं।

किसी को बॉस तो किसी को महाराज की चिंता

खेमेबंदी, गुटबाजी,बोसगिरी और श्रेय लूटने की होड़ के लिए पंजादल बहुत बदनाम था लेकिन अब कमल दल भी इसमें पीछे नहीं खासकर ग्वालियर में तो स्थिति इस कदर खराब है कि जनता समझ ही नहीं पा रही कि आखिर यह हो क्या रहा है। जो काम अभी धरातल पर उतरे भी नहीं हैं जनता को उसका लाभ मिला ही नहीं है लेकिन उन कार्यों का श्रेय लेने की होड़ ऐसी मची हुई है जैसे देखने ,सुनने और समझने वाले पूरी तरह नासमझ हैं अब स्टेशन को ही लीजिए एक तरफ अटलजी तो दूसरी तरफ माधव राव सिंधिया ऐसी श्रेय लेने की होड़ कि रेलमंत्री तक को असमंजस में डाल दिया आखिर करें  तो क्या करें ,जरा सोचिए आज अटलजी होते तो क्या सोचते वैसे भी वर्चस्व और श्रेय की दौड़ में बुद्धि इस प्रकार कुंद हो चली है कि विकास कार्यों को जल्द पूर्ण कराने की तरफ किसी का ध्यान नहीं किसी को बॉस की चिंता है तो किसी को महाराज की ।
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