संयुक्त राष्ट्र ने कश्मीर में मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघन और उसकी जांच की बात कही है. संयुक्त राष्ट्र ने गुरुवार को कहा कि भारत के साथ पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में भी मानवाधिकारों का उल्लंघन हो रहा है.
संयुक्त राष्ट्र में मानवाधिकारों के उच्चायुक्त ज़ायद बिन राड अल हुसैन ने कहा है कि वो मानवाधिकार काउंसिल से अगले हफ़्ते नए सत्र के लिए कहेंगे, जिसमें एक जांच आयोग गठित करने पर विचार किया जाएगा.
अगर यह जांच आयोग बनता है तो कश्मीर में मानवाधिकारों के कथित उल्लंघन की स्वतंत्र जांच की जाएगी.
भारत ने संयुक्त राष्ट्र की इस रिपोर्ट को पूरी तरह से ख़ारिज करते हुए कहा है कि यह भारत की संप्रभुता का उल्लंघन और उसकी क्षेत्रीय एकता के ख़िलाफ़ है.
भारत के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि यूएन की रिपोर्ट अपुष्ट सूचनाओं पर आधारित है और साथ ही पक्षपातपूर्ण है. भारत ने कहा है कि यह एक झूठे ब्यौरे के सिवाय कुछ नहीं है.
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत ने कश्मीर में बहुत ज़्यादा सुरक्षा बलों की तैनाती की है और 2016 के बाद से कई नागरिक मारे गए हैं.
यूएन की इस रिपोर्ट में पाकिस्तान से कहा गया है कि वो आतंकवाद विरोधी क़ानून का दुरुपयोग शांतिपूर्ण विरोध और असहमति को ख़त्म करने में नहीं करे.
समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार यूएन की रिपोर्ट का बड़ा हिस्सा भारत के जम्मू-कश्मीर पर केंद्रित है. इसमें जुलाई 2016 से अप्रैल 2018 के वाक़यों का ज़िक्र किया गया है.
रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि भारत के में 130 से 145 के बीच नागरिक सुरक्षाबलों के हाथों मारे गए और इसी दौरान चरमपंथियों के हाथों 20 नागरिक मारे गए.
रिपोर्ट में लिखा गया है कि 2016 में विरोध प्रदर्शन शुरू हुआ और इसकी प्रतिक्रिया में सुरक्षा बलों ने ज़्यादा ताक़त का इस्तेमाल किया.