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ग्वालियर में भी चार दिवसीय छठ महापर्व 25 अक्टूबर से प्रारम्भ होगा, दो दर्जन स्थानों पर होंगे आयोजन

 

ग्वालियर/ कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी से सप्तमी तिथि तक मनाया जाने वाला चार दिवसीय छठ महापर्व इस बार 25 अक्टूबर से प्रारंभ होगा। महापर्व के पहले दिन 25 अक्टूबर शनिवार को नहाय-खाय और दूसरे दिन 26 अक्टूबर रविवार को खरना होगा। तीसरे दिन 27 अक्टूबर सोमवार की शाम को अस्ताचलगामी और चौथे दिन प्रात:काल 28 अक्टूबर मंगलवार को उदीयमान सूर्य को अर्घ्य प्रदान किया जाएगा।

ग्वालियर में इस वर्ष भी तकरीबन दो दर्जन स्थानों पर निर्मित अस्थाई घाटों पर छठ व्रती छठ मइया और उनके सहोदर सूर्यदेव का आव्हान करेंगे। यह जानकारी तिरहुत जनकल्याण परिषद के महासचिव वरिष्ठ पत्रकार बच्चन बिहारी ने दी।
उन्होंने बताया हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी सभी स्वजन छठव्रती सूर्योपासना कर सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य, संतान प्राप्ति और उनकी दीर्घायु की कामना करेंगे।ग्वालियर में मुख्य पूजा समारोह सावरकर सरोवर ( कटोराताल ) और दीनदयाल नगर में आयोजित किया जाता है।इसके अलावा बिरलानगर लाइन नंबर 10 से 13 क्वार्टर्स, 1 और 2 नंबर काॅलोनी, रेलवे काॅलोनी,गोले का मंदिर, हनुमान नगर, पिंटो पार्क पंप हाउस, जनता, नाका चंद्रबदनी, गुड़ीगुड़ा नाका, गदाईपुरा, मोतीझील, कंप्यूटर 13वीं बटालियन आदि अनेक स्थानों पर जनसहयोग के माध्यम से छठ महापर्व के आयोजन की तैयारी प्रारंभ कर दी गई है।

पूजा कार्यक्रम

नहाय-खाय: 25 अक्तूबर 2025 शनिवार- इस बार नहाय-खाय 25 अक्टूबर शनिवार को मनाया जाएगा। इस दिन व्रती नदी या तालाब में स्नान करने के बाद शुद्ध और सात्विक भोजन ग्रहण करेंगे। दाल-भात लौकी की सब्जी या भात के साथ कद्दू की तरकारी और सरसों के साग का विशेष महत्व बताया गया है।

खरना: 26 अक्टूबर 2025 रविवार- महापर्व के दूसरे दिन 26 अक्टूबर रविवार को छठव्रती को पूरे दिन निर्जला उपवास रखेंगे।
शाम को पूजा-पाठ और छठ मैया को भोग लगाने के बाद प्रसाद के रूप में गुड़ की खीर, रोटी और फल ग्रहण करेंगे। इसी के साथ प्रारंभ हो जाएगा 36 घंटे का कठिन माना जने वाला निर्जला व्रत
जो 28 अक्टूबर मंगलवार को उगते सूर्य को अर्घ्य प्रदान करने के साथ समाप्त हो जाएगा। यहां बता दें व्रत वही महिला पुरुष करते हैं जो मनोकामना पूर्ण होने पर नदी तालाब या ताल तलैयों के जल में खड़े होकर सूर्यदेव को अर्घ्य अर्पित करते हैं।

संध्याकालीन अर्घ्य: 27 अक्टूबर 2025 सोमवार- उत्सव के तीसरे दिन छठव्रती नदी, सरोवर या तालाब में निर्मित अस्थाई घाटों पर पहुंचकर छठी मैया का आवाहन कर अस्त होते सूर्य अर्घ्य देंगे।

प्रात:कालीन अर्घ्य: 28 अक्टूबर 2025 मंगलवार- पर्व के चौथे और अंतिम दिन 28 अक्टूबर मंगलवार को प्रात:काल उगते सूर्य की उपासना की जाएगी। छठव्रती अपने परिजनों और श्रद्घालुओं की उपस्थिति में छठ मैया के भाई सूर्यदेव को अर्घ्य प्रदान कर सुख-समृद्धि और निरोगी काया की कामना करेंगे। यउपासना स्थल पर ही बड़ों का आशीर्वाद प्राप्त करने और अपने से छोटों को आशीष देने एवं ठेकुआ आदि का प्रसाद वितरण के साथ चारदिवसीय छठ महापर्व का समापन हो जाएगा।
तिरहुत जन कल्याण परिषद के अध्यक्ष राजेंद्र ठाकुर, महासचिव बच्चन बिहारी, कोषाध्यक्ष भागीरथ शर्मा, उपाध्यक्ष शुभनारायण झा और यशवंत झा ने मिथिलांचल और पूर्वांचल के प्रवासी बंधुओं से छठ पर आयोजित कार्यक्रमों को सफल बनाने की अपील की है

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