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डॉ. निवेदिता शर्मा बनी मप्र बाल संरक्षण आयोग की अध्‍यक्ष, जारी हुआ पत्र

मूल रूप से मध्‍यप्रदेश में ग्‍वालियर की रहनेवाली डॉ. शर्मा लम्‍बे समय से बालकों के हित में सक्रिय हैं, उन्‍होंने जीवाजी विश्‍वविद्यालय से सूक्ष्‍म जीव विज्ञान में पी-एचडी एवं लॉ तक अध्‍ययन किया है

ग्वालियर 7 मई 2026/मध्य प्रदेश सरकार ने डॉ. निवेदिता शर्मा को राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग का नया अध्यक्ष नियुक्त किया है। यह नियुक्ति मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मुहर के बाद हुई है, जिसका कि पत्र गुरुवार शाम जारी कर दिया गया।

इस संबंध में उन्‍होंने कहा कि सर्वप्रथम मैं माननीय मुख्‍यमंत्री डॉ. मोहन यादव जी का धन्‍यवाद ज्ञापित करती हूं, उन्‍होंने मुझे बालकों के हित में कार्य करने का एक अवसर आयोग अध्‍यक्ष के रूप में प्रदान किया है। मेरा प्रयास रहेगा कि उनकी मंशा के अनुरूप राज्‍य में मैं बालकों के लिए सर्वकल्‍याणकरी कार्य करने में सफल हो सकूं। इसके साथ ही मैं उन सभी वरिष्‍ठों और शुभचिंतकों के लिए भी धन्‍यवाद ज्ञापित करने के साथ बहुत आभार व्‍यक्‍त करती हूं, जिन्‍होंने हर समय में मुझे मार्गदर्शन एवं सहयोग प्रदान‍ किया है।

उल्‍लेखनीय है कि मूलतः ग्वालियर निवासी प्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार डॉ मयंक चतुर्वेदी की पत्नी डॉ. निवेदिता शर्मा वर्तमान में भोपाल निवासरत हैं वे पहले से ही आयोग की सदस्य थीं और विभिन्न जिलों में बाल अधिकारों से जुड़े मामलों की जांच कर चुकी हैं। आयोग बच्चों के अधिकारों की रक्षा, बाल श्रम, बाल विवाह और संबंधित अपराधों पर निगरानी रखता है। वर्ष 2022 में पूर्व में मप्र बाल आयोग की सदस्‍य बनाए जाने के बाद डॉ. निवेदिता शर्मा ने प्रदेश भर में सक्रिय रहते हुए बालकों के हित में अनेक कार्य किए, वहीं जहां बच्‍चों के साथ अन्‍याय हो रहा था, उन मामलों को उजागर करते हुए सरकार से उन्‍हें ठीक कराने की दिशा में बड़ा कार्य किया था।

वे लंबित प्रकरणों की सुनवाई के दौरान विशेष तौर पर छात्रावासों, मदरसों, विद्यालयों में सख्‍त जांच के लिए भी जानी जाती हैं, इसलिए उनकी नियुक्ति को बाल कल्याण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उनका नियुक्ति संबंधी आदेश आज दिनांक यानी सात मई 2026 के दिन जारी हुआ है। मूल रूप से मध्‍यप्रदेश में ग्‍वालियर की रहनेवाली डॉ. शर्मा लम्‍बे समय से बालकों के हित में सक्रिय हैं, उन्‍होंने जीवाजी विश्‍वविद्यालय से सूक्ष्‍म जीव विज्ञान में पी-एचडी एवं लॉ तक अध्‍ययन किया है। साथ ही कई शोध-पत्र एवं रानी दुर्गावती के जीवन चरित्र पर आधारित शोध पुस्‍तक का भी वे लेखन कर चुकी हैं।

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