Homeप्रमुख खबरेंवैभव पर अंगुली उठाना गलत, अम्पायर के गलत निर्णय और लंका के...

वैभव पर अंगुली उठाना गलत, अम्पायर के गलत निर्णय और लंका के खिलाड़ी के उकसावे वाले बोल हैं विवाद की असल वजह 

प्रवीण दुबे 
वैभव पर अंगुली उठाना गलत, अम्पायर के गलत निर्णय और लंका के खिलाड़ी के उकसावे वाले बोल हैं विवाद की असल वजह 
वैभव सूर्यवंशी नहीं, अंपायरिंग फैसले बने विवाद की जड़! जांच का केंद्र खिलाड़ियों का व्यवहार नहीं बल्कि अंपायरों की भूमिका
भारत ए और श्रीलंका ए के बीच खेले गए मुकाबले के बाद वैभव सूर्यवंशी चर्चा के केंद्र में आ गए हैं, लेकिन मैच से जुड़े घटनाक्रमों पर नजर डालें तो सवाल खिलाड़ी के व्यवहार से अधिक अंपायरिंग फैसलों पर खड़े होते दिखाई देते हैं।
मैच के दौरान सबसे बड़ा विवाद खराब रोशनी में खेल जारी रखने को लेकर सामने आया। श्रीलंका की टीम 265 रन पर सिमटने के बाद भारतीय खिलाड़ी दोनों मैदानी अंपायरों के पास पहुंचे थे और कम होती विजिबिलिटी को लेकर चिंता जताई थी। खिलाड़ियों का कहना था कि गेंद स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं दे रही थी।
इसके बावजूद अंपायरों ने न केवल खेल जारी रखा बल्कि सुपर ओवर कराने का भी फैसला लिया। क्रिकेट के स्थापित मानकों के अनुसार खराब रोशनी में आमतौर पर स्पिन गेंदबाजों को प्राथमिकता दी जाती है, जबकि इस मुकाबले में तेज गेंदबाजों को गेंदबाजी की अनुमति दी गई। यही फैसला पूरे विवाद का मुख्य कारण बनता दिख रहा है।
सुपर ओवर के दौरान श्रीलंका ए की पारी की अंतिम गेंद पर थर्ड अंपायर ने हाईट के आधार पर नो-बॉल करार दिया, जबकि मैदानी अंपायर ने ऐसा कोई संकेत नहीं दिया था। इस फैसले ने भारतीय खेमे में नाराजगी और बढ़ा दी। विरोध के कारण खेल रुका और इस दौरान रोशनी की स्थिति और खराब हो गई।
रिपोर्ट्स के अनुसार भारतीय टीम की नाराजगी का दूसरा कारण श्रीलंका ए की ओर से सुपर ओवर में बल्लेबाजी के लिए आने में हुई देरी भी थी। इससे खिलाड़ियों का धैर्य प्रभावित हुआ और मैदान पर तनाव बढ़ा।
वैभव सूर्यवंशी से जुड़े घटनाक्रम को लेकर भी सामने आया है कि वह वापस जा रहे थे, लेकिन श्रीलंकाई खिलाड़ी की ओर से कथित उकसावे के बाद ही वह दोबारा पलटे। यदि यह तथ्य सही पाया जाता है तो फिर पूरे मामले को केवल वैभव के आचरण तक सीमित करके देखना उचित नहीं होगा।
क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि इस विवाद की वास्तविक जांच इस बात पर केंद्रित होनी चाहिए कि जब खिलाड़ियों को गेंद दिखाई नहीं दे रही थी तो सुपर ओवर क्यों कराया गया, खराब रोशनी में तेज गेंदबाजों को अनुमति क्यों दी गई और विवादित नो-बॉल फैसले तक स्थिति कैसे पहुंची।
ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि यदि मैच प्रबंधन और अंपायरिंग से जुड़े फैसले विवाद की मूल वजह थे, तो जांच का दायरा केवल खिलाड़ियों तक सीमित न रहकर अंपायरों और मैच अधिकारियों की भूमिका तक भी पहुंचना चाहिए।
RELATED ARTICLES

Most Popular

Recent Comments