नई दिल्ली 8 अगस्त 2026/ जिस बात की आशंका व्यक्त की जा रही थी वही हो रहा है ईसाई संगठनों विशेषकर विदेशी फंडिग से देश में धर्मातरण के खेल में जुटी तमाम मिशनरीज FCRA बिल लाये जाने के कारण हाय तौबा करने पर उतारू हैं सबसे बड़ी बात है कि अमेरिका तक से इस बिल के खिलाफ भारत को धमकियां मिली हैं और आश्चर्य की बात है कि कांग्रेस समेत उसके तमाम सहयोगी संगठन इस बिल की पुरजोर खिलाफत पर उतारू हो गए हैं संसद में यह बिल पास न हो सके इसकी पूरी तैयारी कर ली गई है।
संसद के मॉनसून सत्र के आखिरी हफ्ते में भारी हंगामे के आसार हैं। विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक यानी FCRA बिल के मुद्दे पर कांग्रेस समेत पूरा विपक्ष सरकार को घेरने की तैयारी में है। कांग्रेस ने शुक्रवार दोपहर एक तीन लाइन का व्हिप जारी कर अपने सभी लोकसभा सांसदों को 10, 11 और 12 अगस्त को सदन में अनिवार्य रूप से मौजूद रहने का निर्देश दिया है। उम्मीद जताई जा रही है कि अन्य विपक्षी दल भी जल्द ही ऐसा कदम उठाएंगे।
ऐसी संभावना है कि 10 अगस्त को लोकसभा में FCRA संशोधन बिल पेश किया जा सकता है। चूंकि यह बिल गृह मंत्रालय से जुड़ा है, इसलिए विपक्ष को पूरी उम्मीद है कि इस दौरान गृह मंत्री अमित शाह सदन में मौजूद रहेंगे।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के कार्यालय में हुई एक अहम बैठक में कांग्रेस नेतृत्व ने अपने सहयोगी दलों को भी सलाह दी है कि वे सुनिश्चित करें कि सोमवार से उनके सभी सांसद सदन में अपनी पूरी ताकत के साथ मौजूद रहें।
दरअसल, विपक्ष मॉनसून सत्र की शुरुआत से ही यह मांग कर रहा है कि 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर अमित शाह सदन में बयान दें। इस मुद्दे को लेकर सत्र में कई बार गतिरोध भी देखने को मिला है।
क्या है FCRA बिल और इसका विवाद?
FCRA बिल को लेकर खासा विवाद रहा है। विशेष रूप से ईसाई संगठनों में बिल के उस प्रावधान को लेकर चिंता है, जिसके तहत एफसीआरए (FCRA) रजिस्ट्रेशन खत्म होने वाले संगठनों की संपत्तियों पर सरकार द्वारा नामित अथॉरिटी को पिछली तारीख से अधिकार मिल सकता है।
यह बिल भाजपा के लिए राजनीतिक रूप से काफी संवेदनशील है, क्योंकि कई चर्च और ईसाई संस्थानों का निर्माण विदेशी चंदे से हुआ है और वे FCRA के तहत आते हैं। भाजपा खासकर केरल जैसे राज्यों में ईसाइयों के बीच अपना जनाधार बढ़ाना चाहती है, इसलिए वह इन चिंताओं को दूर करने की पूरी कोशिश कर रही है।
रिपोर्ट के मुताबिक, बुधवार को सरकार ने संकेत दिया था कि इस बिल में कोई दंडात्मक रेट्रोस्पेक्टिव (पूर्वव्यापी) प्रावधान नहीं होगा। गुरुवार को मिजोरम के मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने अमित शाह से मुलाकात कर इस बिल पर अपनी चिंता जताते हुए एक ज्ञापन सौंपा। लालदुहोमा ने मीडिया को बताया कि गृह मंत्री ने उन्हें आश्वासन दिया है कि बिल 12 अगस्त को लोकसभा में लाया जाएगा और इसमें कोई रेट्रोस्पेक्टिव क्लॉज (पिछली तारीख से लागू होने वाला नियम) शामिल नहीं होगा।
संसद का मॉनसून सत्र 13 अगस्त को समाप्त होने वाला है। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू स्पष्ट कर चुके हैं कि फिलहाल सत्र की अवधि को आगे बढ़ाने का कोई प्रस्ताव नहीं है। इस बीच, राज्यसभा के सभापति और उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने गुरुवार को रिजिजू से कहा था कि वह विपक्ष की भावनाओं से अमित शाह को अवगत कराएं और सदन में उनकी उपस्थिति के विपक्ष के अनुरोध पर विचार करें।