प्रवीण दुबे
ग्वालियर एयरबेस की सुरक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल, आखिर प्रतिबंधित क्षेत्र तक कैसे पहुंचे चोर?
जिस स्थान के प्रवेश द्वार तक पहुंचना तक बेहद मुश्किल है अगर बिना अनुमति अंदर प्रवेश किया तो sbgeeदेश की सुरक्षा से सीधे जुड़े ग्वालियर एयरफोर्स स्टेशन परिसर से एयरक्राफ्ट में इस्तेमाल होने वाले एवियोनिक्स स्क्रैप की चोरी की घटना ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सामने आई जानकारी के अनुसार चोरी किया गया स्क्रैप कथित तौर पर कचरा गाड़ी में छिपाकर एयरफोर्स स्टेशन परिसर से बाहर ले जाया गया। यदि यह तथ्य जांच में सही पाया जाता है तो यह केवल चोरी की सामान्य घटना नहीं, बल्कि एक अत्यंत संवेदनशील सैन्य प्रतिष्ठान की आंतरिक सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था से जुड़ा गंभीर मामला है।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर एयरक्राफ्ट में इस्तेमाल होने वाले एवियोनिक्स से संबंधित स्क्रैप तक बाहरी लोग कैसे पहुंचे और उसे परिसर से बाहर ले जाने में सफल कैसे हो गए?
बाहरी व्यक्ति संवेदनशील क्षेत्र तक कैसे पहुंचा?

ग्वालियर का एयरफोर्स स्टेशन सामान्य हवाई अड्डा नहीं है। यहां भारतीय वायुसेना की महत्वपूर्ण परिचालन और तकनीकी गतिविधियां संचालित होती हैं। सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी के अनुसार यहां 40 विंग की महत्वपूर्ण भूमिका रही है और 1980 के दशक के मध्य से ग्वालियर एयरबेस मिराज-2000 लड़ाकू विमानों से विशेष रूप से जुड़ा रहा है।
ऐसे संवेदनशील सैन्य परिसर में बाहरी लोगों की आवाजाही स्वाभाविक रूप से नियंत्रित होती है। सफाई, रखरखाव, ठेके और अन्य सेवाओं से जुड़े कर्मचारियों की गतिविधियां भी निर्धारित क्षेत्रों और सुरक्षा प्रक्रियाओं के अधीन होनी चाहिए।
ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि—
क्या चोरी करने वाले लोग अधिकृत कर्मचारी बनकर अंदर पहुंचे?
क्या उन्हें किसी निर्धारित क्षेत्र से आगे जाने की अनुमति मिली थी?
क्या कचरा गाड़ियों की नियमित तलाशी और निगरानी की व्यवस्था थी?
क्या बाहर निकलने वाले वाहनों में मौजूद सामग्री का भौतिक सत्यापन किया जाता था?
और सबसे महत्वपूर्ण—
एवियोनिक्स स्क्रैप आखिर उस स्थान तक पहुंचा ही कैसे, जहां से उसे चोरी किया जा सका?
मामला केवल स्क्रैप चोरी का नहीं
एवियोनिक्स शब्द विमान की इलेक्ट्रॉनिक प्रणालियों से संबंधित उपकरणों और उनके हिस्सों के लिए इस्तेमाल होता है। इसलिए यदि चोरी हुआ सामान वास्तव में एयरक्राफ्ट से संबंधित एवियोनिक्स स्क्रैप है, तो जांच का दायरा केवल चोरी और कबाड़ की बिक्री तक सीमित नहीं रहना चाहिए।
जांच में यह भी देखा जाना चाहिए कि चोरी की गई सामग्री किस प्रकृति की थी, वह कहां रखी गई थी, वहां तक किस-किस व्यक्ति की पहुंच थी, स्क्रैप की निकासी की अनुमति किस प्रक्रिया के तहत होती है और चोरी के दिन संबंधित क्षेत्र में कौन-कौन लोग अथवा वाहन पहुंचे थे।
ग्वालियर एयरबेस का रहा है बेहद महत्वपूर्ण सैन्य इतिहास
ग्वालियर का महाराजपुर एयरफील्ड द्वितीय विश्वयुद्ध के दौर से सैन्य विमानन से जुड़ा रहा है। बाद के वर्षों में यहां भारतीय वायुसेना की महत्वपूर्ण इकाइयां स्थापित हुईं। 1982 में 40 विंग के गठन के बाद एयरबेस को मिराज-2000 विमानों के संचालन के लिए विकसित किया गया और 1985-86 के बाद ग्वालियर मिराज-2000 से जुड़ी प्रमुख वायुसेना गतिविधियों का केंद्र बना।
ग्वालियर की विशेषता केवल लड़ाकू विमानों की मौजूदगी तक सीमित नहीं है। यहां Tactics and Air Combat Development Establishment (TACDE) जैसी उन्नत सामरिक प्रशिक्षण व्यवस्था भी रही है, जिसे भारतीय वायुसेना के अत्यंत महत्वपूर्ण प्रशिक्षण प्रतिष्ठानों में गिना जाता है।
यही कारण है कि ग्वालियर एयरफोर्स स्टेशन की सुरक्षा का महत्व सामान्य सैन्य प्रतिष्ठान से कहीं अधिक माना जाता है।
पहले भी सुरक्षा के लिहाज से संवेदनशील रहा है क्षेत्र
ग्वालियर एयरफोर्स स्टेशन और उससे जुड़ी सैन्य गतिविधियां पहले भी सुरक्षा एजेंसियों और देश विरोधी गतिविधियों से जुड़े मामलों के संदर्भ में चर्चा में रही हैं। ऐसे संवेदनशील प्रतिष्ठान के आसपास संदिग्ध गतिविधियों को लेकर पहले से ही सुरक्षा एजेंसियां सतर्क रहती हैं।
ऐसे में यदि अब स्टेशन परिसर से ही एयरक्राफ्ट से संबंधित स्क्रैप बाहर निकलने की घटना सामने आती है, तो यह सुरक्षा व्यवस्था की कई कड़ियों की समीक्षा की जरूरत बताती है।
जांच में इन सवालों के जवाब जरूरी
इस घटना के बाद सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही हैं—
1. चोरी हुआ एवियोनिक्स स्क्रैप किस क्षेत्र में रखा गया था?
2. उस क्षेत्र में प्रवेश की अनुमति किन लोगों को थी?
3. सफाई और कचरा उठाने वाली एजेंसी के कर्मचारियों की जांच कैसे होती है?
4. परिसर से बाहर निकलने वाली कचरा गाड़ियों की तलाशी और सत्यापन की क्या प्रक्रिया है?
5. चोरी का सामान कचरा गाड़ी तक कैसे पहुंचा?
6. क्या संबंधित क्षेत्र में CCTV निगरानी उपलब्ध थी और घटना के समय रिकॉर्डिंग सुरक्षित है?
7. स्क्रैप की निकासी के लिए निर्धारित सरकारी/वायुसेना प्रक्रिया क्या है और उसका पालन हुआ या नहीं?
8. क्या चोरी में किसी अंदरूनी व्यक्ति की भूमिका की भी जांच की जा रही है?
सुरक्षा में छोटी चूक भी बड़ा खतरा बन सकती है
यह घटना इसलिए भी गंभीर है क्योंकि किसी सैन्य प्रतिष्ठान की सुरक्षा केवल मुख्य द्वार पर तैनात सुरक्षा कर्मियों तक सीमित नहीं होती। अंदर प्रवेश, अलग-अलग संवेदनशील क्षेत्रों की पहुंच, वाहनों की आवाजाही, कचरा और स्क्रैप की निकासी तथा परिसर से बाहर जाने वाली प्रत्येक सामग्री की निगरानी—सभी सुरक्षा व्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ियां हैं।
यदि इन कड़ियों में से किसी एक में भी गंभीर चूक हुई है तो उसकी पहचान करना जरूरी है।
सवाल चोरी गए कबाड़ की कीमत का नहीं, बल्कि उस सुरक्षा तंत्र का है जिसके भीतर से संवेदनशील विमानन सामग्री बाहर निकलने में सफल हुई।
अब देखना यह है कि जांच एजेंसियां इस घटना को केवल चोरी के मामले के रूप में देखती हैं या फिर इसे राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े गंभीर सुरक्षा ऑडिट के रूप में लेते हुए पूरे घटनाक्रम की तह तक पहुंचती हैं।