प्रवीण दुबे
ग्वालियर 16 सितंबर 2025/ यूपीआई के जरिए होने वाले डिजिटल भुगतान को लेकर प्रस्तावित नए फ्रेमवर्क में मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) यानी डिजिटल पेमेंट स्वीकार करने वाले व्यापारियों से जुड़े शुल्क को लेकर देशभर के व्यापारियों में चिंता और आक्रोश की स्थिति देखने को मिल रही है। ग्वालियर में भी इस मुद्दे को लेकर व्यापारिक जगत में बेचैनी सामने आई है।
एमडीआर को आसान भाषा में समझें तो यह वह शुल्क है जो डिजिटल भुगतान स्वीकार करने वाले मर्चेंट से संबंधित होता है। उदाहरण के लिए, यदि किसी व्यवस्था के तहत किसी मर्चेंट पेमेंट पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर निर्धारित होता है और ग्राहक 10 हजार रुपये का यूपीआई भुगतान करता है, तो एमडीआर की राशि 40 रुपये होगी। हालांकि, इस व्यवस्था में ग्राहक से यह राशि अलग से वसूल नहीं की जानी है, बल्कि शुल्क का भार मर्चेंट यानी दुकानदार पर पड़ता है।
यही व्यवस्था व्यापारियों के बीच चिंता का प्रमुख कारण बनी हुई है। व्यापारियों का कहना है कि डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के दौर में यदि इस प्रकार के शुल्क का भार सीधे व्यापारियों पर आता है तो इससे उनके कारोबार की लागत बढ़ सकती है।
‘मामले का पूरा अध्ययन जरूरी’
इस संबंध में ग्वालियर चेम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के अध्यक्ष डॉ. प्रवीण अग्रवाल ने शब्दशक्ति न्यूज़ से बातचीत में कहा कि निःसंदेह एमडीआर को लेकर व्यापारियों में गुस्सा और चिंता है, लेकिन इस पूरे मामले का विस्तार से अध्ययन किया जाना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार का शुल्क केवल व्यापारियों या दुकानदारों से ही वसूल किया जाना उचित नहीं होना चाहिए। इस विषय में जल्दबाजी में कोई निष्कर्ष निकालने के बजाय इसके सभी पहलुओं को समझना जरूरी है।
डॉ. अग्रवाल ने बताया कि ग्वालियर चेम्बर ऑफ कॉमर्स इस पूरे मामले का व्यापक रूप से अध्ययन कर रहा है। अध्ययन के बाद व्यापारियों के हित में सरकार को पत्र लिखकर आवश्यक सुझाव दिए जाएंगे।
उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार व्यापारियों की चिंताओं और सुझावों पर उदारतापूर्वक विचार करेगी तथा ऐसी व्यवस्था बनाने का प्रयास होगा जिससे डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के साथ-साथ व्यापारियों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ भी न पड़े।
व्यापार जगत की नजर सरकार के अगले कदम पर
यूपीआई देश में डिजिटल भुगतान का एक महत्वपूर्ण माध्यम बन चुका है। ऐसे में एमडीआर से संबंधित किसी भी नई व्यवस्था का सीधा असर लाखों व्यापारियों और छोटे दुकानदारों पर पड़ सकता है। ग्वालियर चेम्बर द्वारा इस विषय का अध्ययन कर सरकार को दिए जाने वाले सुझावों को लेकर स्थानीय व्यापार जगत की निगाहें अब आगे की प्रक्रिया पर टिकी हैं।