RSS अपने संगठन के 100 साल पूरे होने के मौके पर सालभर से कार्यक्रमों का आयोजन कर रहा है। इसका समापन 29 नवंबर को दिल्ली में संघ प्रमुख मोहन भागवत की एक सार्वजनिक सभा के साथ करेगा। कार्यक्रम की जगह अभी तय नहीं हुई है। हालांकि संघ की योजना है कि इसमें करीब एक लाख स्वयंसेवक RSS की गणवेश में शामिल हों। इसके अलावा करीब 50 हजार आमंत्रित नागरिक भी कार्यक्रम में मौजूद रहेंगे।
संघ के सूत्रों के मुताबिक, यह पूरे साल देश के अलग-अलग शहरों में चल रहे स्वयंसेवकों के ‘एकत्रीकरण’ कार्यक्रम का समापन होगा।
सर संघचालक मोहन भागवत इस कार्यक्रम में संघ के अब तक के सफर के साथ-साथ हाल के दिनों में देश के सामने मौजूद विभिन्न मुद्दों पर भी बात कर सकते हैं। भागवत RSS के ऐसे पहले प्रमुख हैं जिन्होंने संघ का पक्ष स्पष्ट करने के लिए समय-समय पर सार्वजनिक व्याख्यान दिए हैं। उनका पहला ऐसा व्याख्यान 2018 में हुआ था।
इसके बाद उन्होंने 26 से 28 अगस्त 2025 तक दिल्ली के विज्ञान भवन में तीन दिन तक व्याख्यान भी किया था। इसमें RSS के 100 साल के सफर पर बात की गई थी। हाल ही में भागवत ने न्यूयॉर्क के मैडिसन स्क्वायर गार्डन में भारतीय प्रवासियों को संबोधित किया था। इसके अलावा वह RSS के शताब्दी वर्ष के वैश्विक संपर्क अभियान के तहत लंदन और टोरंटो भी गए थे।
युवकों छात्रों को संबोधन
दिल्ली के जंतर-मंतर पर युवाओं का विरोध प्रदर्शन खत्म होने के कुछ दिनों बाद 6 अगस्त को भागवत ने मुंबई में Gen Z छात्रों को संबोधित किया था। हालांकि संघ के सूत्रों का कहना है कि मुंबई का यह कार्यक्रम कई महीने पहले ही तय हो चुका था और इसका दिल्ली या दूसरे शहरों में हुए Gen Z विरोध प्रदर्शनों से कोई संबंध नहीं था।
RSS ने अपने 100 साल पूरे होने से लेकर 101वें साल तक कई तरह के कार्यक्रम आयोजित करने की योजना बनाई थी। इसका मकसद देशभर के अलग-अलग स्थानों पर स्वयंसेवकों को एकजुट करना और समाज के विभिन्न वर्गों तक पहुंच बनाना था।
इन कार्यक्रमों में से एक ‘प्रबुद्ध नागरिक सम्मेलन’ था। देश के सभी जिलों में ऐसे सम्मेलन आयोजित किए गए। इनमें डॉक्टर, इंजीनियर, प्रोफेसर और दूसरे पेशेवर लोगों से संपर्क करने और उन्हें संघ की विचारधारा से जोड़ने की कोशिश की गई।
एक अन्य अभियान ‘गृह संपर्क’ था। इसके तहत RSS के स्वयंसेवक लोगों के घरों और आसपास के इलाकों में जाकर उनसे बातचीत करते थे। इसके साथ ही उन्हें RSS से जुड़ी सामग्री भी दी जाती थी ताकि वे संगठन के बारे में जान सकें।
हिंदू सम्मेलनों का आयोजन
संघ ने देश के ग्रामीण और शहरी इलाकों में ‘हिंदू सम्मेलन’ भी आयोजित किए। इनका उद्देश्य हिंदू समुदाय के अलग-अलग वर्गों के बीच एकता और सामाजिक सद्भाव को बढ़ावा देना था। RSS ने अपने शताब्दी वर्ष के एजेंडे में ‘पंच परिवर्तन’ को भी शामिल किया। इसमें सामाजिक समरसता, कुटुंब प्रबोधन (परिवार के प्रति जागरूकता), नागरिक कर्तव्य, पर्यावरण संरक्षण और स्वदेशी (आत्मनिर्भरता) शामिल हैं।
7 जुलाई 2025 को RSS के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने संघ के शताब्दी वर्ष की तैयारियों के बारे में जानकारी दी थी। उन्होंने कहा था कि उस समय देश में 58964 मंडल और 44055 बस्तियां थीं। इन जगहों पर होने वाले सम्मेलनों में सामाजिक पर्व, सामाजिक एकता-सद्भाव और ‘पंच परिवर्तन’ जैसे विषयों पर चर्चा की जानी थी।
उन्होंने बताया था कि समाज में सामाजिक सद्भाव बढ़ाने के लिए 11360 ब्लॉक और कस्बों में ‘सामाजिक सद्भाव बैठकें’ भी आयोजित की जाएंगी
संघ व्यवस्था के मुताबिक देश में कुल 924 जिले हैं। इन जिलों में ‘प्रमुख नागरिक सेमिनार’ आयोजित किए जाने थे। इनमें भारत के विचार, भारत का गौरव और भारत की सेवा जैसे विषयों पर चर्चा होनी थी।
संघ ने ऐसे समय में ‘सामाजिक सद्भाव बैठकें’ भी आयोजित कीं जब जाति का मुद्दा लगातार चर्चा और राजनीतिक ध्रुवीकरण का विषय बना हुआ है। इन बैठकों का उद्देश्य जातिगत दूरी कम करना था।
RSS के शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों में व्याख्यान कार्यक्रमों और विदेशों में संपर्क अभियान भी शामिल रहे हैं। RSS के एक सूत्र ने कहा कि दिल्ली में मोहन भागवत की सार्वजनिक सभा को स्वयंसेवकों के ‘एकत्रीकरण’ कार्यक्रम की आखिरी कड़ी के तौर पर देखा जाना चाहिए। इसके साथ ही संघ के शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों का भी समापन हो जाएगा।