एनकाउंटर करने के बाद पुलिस ने बताया कि उन दोनों ने पुलिस पर 34 राउंड फायरिंग की थी। मौके पर मौजूद द टाइम्स ऑफ इंडिया के फोटोजर्नलिस्ट ने बताया कि यह भारत का पहला ऐसा एनकाउंटर है जिसका गवाह बनने के लिए पत्रकारों को बुलाया गया था। बताया जाता है कि कैमरा, पत्रकारों और क्रू सदस्यों को एनकाउंटर साइट से 100 मीटर दूर रहने का आदेश दिया गया था। उनमें से किसी को भी बुलेटप्रूफ जैकेट नहीं दिया गया था।
जब पुलिस से पूछा गया कि पत्रकारों को एनकाउंटर साइट पर क्यों बुलाया गया इस पर अलीगढ़ एसएसपी अजय कुमार साहनी ने कहा कि इसमें कुछ गलत नहीं है। हम मीडिया को सबसे पहले सूचना देना चाहते थे, हमें ऊपर से आदेश था कि एनकाउंटर की सारी डिटेल्स मीडिया के साथ शेयर की जाए। उनसे कुछ भी छुपाया ना जाए। अगर कोई फोटो लेना चाहे या वीडियो शूट करना चाहे तो वह स्वतंत्र है।
एसएसपी ने आगे बताया कि मुस्तकिन और नौशाद पिछले एक महीने के अंदर छह लोगों के मर्डर के आरोपी थे। एनकाउंटर के समय पलिमुकिमपुर थाने के इंचार्ज प्रदीप कुमार श्रीवास्तव घायल हो गए जिन्हें इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया है। इधर मुस्तकिन और नौशाद के परिजनों ने प्रेस मीट कर कहा कि ये एनकाउंटर फेक था।
दोनों मृतकों में से एक की मां ने कहा कि मेरे बेटे को रविवार सुबह-सुबह पुलिस घर से उठा कर ले गई और उसकी बर्बरतापूर्ण हत्या कर दी। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक पिछले साल मार्च में मुख्यमंत्री योगी के आने के बाद राज्य में अब तक 66 एनकाउंटर हो चुके हैं।