क्या मध्यप्रदेश में कांग्रेस ने तय कर लिया है कि बुजुर्ग कमलनाथ ही मुख्यमंत्री का चेहरा होंगे। हम ऐसा इसलिए कह रहे हैं क्योंकि मध्यप्रदेश में कमलनाथ के राजनीतिक सफर व उपलब्धियों को बैनर पोस्टर व अन्य माध्यमों से जिस प्रकार बखान किया जा रहा है वह स्वयं ही इस बात की गवाही दे रहा है। यह देखकर कांग्रेस के भीतर खासकर ग्वालियर चम्बल अंचल में ज्योतिरादित्य समर्थकों में बेचैनी देखी जा रही है। इस बात का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि राहुल गांधी की लाख समझाइश के बावजूद कांग्रेस में टिकट चयन का मुद्दा भोपाल स्तर पर उलझ गया है और बात अब दिल्ली दरबार तक जा पहुंची है। कांग्रेस के सभी छत्रप इस बात में जुट गए हैं कि अपने अपने पट्ठों को ज्यादा से ज्यादा टिकिट दिलाये जा सकें ताकि चुनाव बाद इनकी संख्याबल के सहारे मुख्यमंत्री पद हथियाने का दबाव बनाया जा सके।
यूँ हो रहा है कमलनाथ का गुणगान
कमलनाथ कांग्रेस के सबसे वरिष्ठ नेताओं में से एक है, वे पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के दौर से राजनीति में सफर कर रहे है। बीते 40 सालों के राजनैतिक करियर में उन्होंने पार्टी को बड़ी मजबूती दी। वही मध्यप्रदेश से लेकर दिल्ली तक उनका दबदबा रहा ।
यह उठ रहे सवाल
ऐसे में सिर्फ एक विधानसभा चुनाव के लिए जीतने के लिए उन्हें अपनी पहचान बताने की क्या जरुरत है? कही इसके पीछे कांग्रेस का मकसद कमलनाथ को सीएम प्रोजेक्ट करना तो नही। चुंकी राहुल गांधी लगातार मप्र के दौरे कर रहे ,पार्टी में टिकटों को लेकर मंथन चल रहा है, चुनाव नजदीक और समय कम। इस पोस्टर के लगाए जाने के बाद एक के बाद एक कई सवाल खड़ा हो रहे है।