तीन राज्यों में मिली हार के बाद अब भाजपा ने लोकसभा चुनाव की तैयारी शुरू कर दी है लेकिन आश्चर्य की बात यह है कि पार्टी शीर्ष नेतृत्व ने हार के कारणों पर समीक्षा किये बगैर ही अन्य राज्यों के साथ हारे हुए प्रदेशों में भी लोकसभा चुनाव प्रभारियों के नाम तय कर दिए हैं इससे भी ज्यादा आश्चर्य की बात यह है कि मध्यप्रदेश में जिन्हें चुनाव प्रभारी बनाया गया है वे विधानसभा चुनाव में मध्यप्रदेश में ग्वालियर चम्बल समभाग के प्रभारी बनाये गए थे इस सम्भाग में पार्टी का सूपड़ा साफ होने के बावजूद उन्हें अब लोकसभा चुनाव के लिए पूरे मध्यप्रदेश का प्रभारी बना दिया गया है। पार्टी ने प्रदेश प्रभारी के तौर पर स्वतंत्र देव को नियुक्त किया गया है। लेकिन अब पार्टी के अंदर ही उनके खिलाफ बगावत होने लगी है। नेता कह रहे हैं कि इससे पहले देव को विधानसभा चुनाव के लिए ग्वालियर चंबल की जिम्मेदारी दी गई थी। पार्टी को सबसे बुरी हार वहीं मिली। फिर भी पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने उन्हें लोकसभा के लिए कमान सौंप दी। पार्टी नेताओं में आलाकमान के इस फैसले से आक्रोश है। लेकिन खुलकर कोई इस बारे में नहीं बोल रहा है। दबी जुबान चर्चा कर रहे हैं। पार्टी नेताओं का मानना है कि लोकसभा के लिए प्रभारी बनाए गए स्वतंत्र देव की प्रदेश में खास पकड़ नहीं है। पार्टी नेताओं के साथ भी उनका कोई खास तालमेल नहीं है। लेकिन पार्टी ने उन्हें जिम्मेदारी सौंपी है तो उनकी बात का ख्याल रखा जाएगा। वहीं, पार्टी के एक धड़े का कहना है कि ग्वालियर-चंबल में विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद अब वह कैसे पार्टी की नैया पार लगाएंगे इस को लेकर संशय है। बीजेपी नेताओं का कहना है कि हाईकमान को प्रदेश के किसी कद्दावर नेता को यह जिम्मेदारी सौंपनी चाहिए थी। जिनकी संगठन और पार्टी के में अच्छी पकड़ है। लेकिन ऐसा नहीं होने से लोकसभा चुनाव के नतीजों पर भी काफी प्रभाव पड़ सकता है। गौरतलब है कि बुधवार को बीजेपी ने लोकसभा चुनाव के मद्देनजर कई प्रदेशों के लोकसभा प्रभारी और सह प्रभारी नियुक्त किए हैं।
जिसने कराया सम्भाग में सूपड़ा साफ भाजपा नेतृत्व ने उसे ही सौंप दी पूरे मध्यप्रदेश की कमान
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