शास्त्रीय संगीत की सैकड़ों वर्ष पुरानी संगीत कला के सबसे पुराने और भव्य समारोह में शीर्ष स्थान रखने वाला ग्वालियर का तानसेन संगीत समारोह को लेकर मध्यप्रदेश का कला और संस्कृति विभाग अभी अपनी कुम्भ कर्णी नींद से जागा नहीं है। इस समारोह को प्रति वर्ष परम्परागत ढंग से दिसम्बर के प्रथम या दूसरे सप्ताह में आयोजित किया जाता है।
हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत को विश्व में गुँजायमान करने में तानसेन समारोह की सफल और सुस्पष्ट भूमिका रही है। संगीत की इस यशोगाथा के परचम को देश के मूर्धन्य संगीतकारों में अपनी सतत् साधना से विश्व संगीत जगत में फहराया है।
स्टेट समय से आयोजित होते आ रहे इस संगीत समारोह ने यूँ तो कई उतार चढ़ाव देखे लेकिन एक बात जो हमेशा कायम रही वह है इसकी भव्यता और इस संगीत समारोह के प्रति कलाकारों का समर्पण। इतिहास साक्षी है कि देश का शायद ही कोई बड़ा शास्त्रीय संगीत कलाकार ऐसा होगा जिसने इस संगीत समारोह में शिरकत न की हो। इस संगीत समारोह में शिरकत किये बिना कोई भी शास्त्रीय संगीत कलाकार खुद को अधूरा मानता है।
इस गौरवशाली इतिहास को अपने भीतर समेटने वाले इस संगीत समारोह की बीते कुछ वर्षों में अनदेखी होती रही है। हालांकि पिछले वर्ष प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री जयभान सिंह पवैया के प्रयासों के चलते इसे भव्यता प्रदान करने की सफल कोशिश की गई थी।
लेकिन ऐसा लगता है कि प्रदेश का संस्कृति विभाग इस समारोह के लगातार अनदेखी के अपने स्वभाव को बदलना नहीं चाहता है। शायद यही वजह है कि एक पखवाड़े का समय ही शेष रहने के बावजूद अभी तक इसके आयोजन की कोई हलचल दिखाई नहीं दे रही है।
अनदेखी का आलम यह है कि महीनों पहले घोषित कर दिए जाने वाले तानसेन सम्मान तक की घोषणा नहीं की गई है। हालांकि इस प्रतिष्ठित समारोह के लिए गठित जूरी की बैठक आयोजित किये जाने की परंपरा की खानापूर्ति अवश्य कर दी गई,लेकिन जूरी ने तानसेन सम्मान के लिए किसका नाम तय किया या फिर आयोजन को लेकर और क्या कुछ तय किया गया किसी को नहीं मालूम।
उल्लेखनीय है कि इस समारोह का इतिहास साक्षी है कि इसमें प्रदान किये जाने वाले तानसेन अलंकरण को प्रदेश के मुख्यमंत्री प्रदान करते रहे लेकिन इस समारोह की गरिमा कितनी गिरा दी गई कि मुख्यमंत्री ने इसमें शिरकत करना अब बन्द कर दिया है। यूँ तो इस समारोह में अब विदेशी कलाकारों की महफिलें भी सजने लगी हैं लेकिन इसके प्रचार प्रसार को महत्व नहीं दिए जाने से इसकी गरिमा समयानुसार नहीं बढ़ी है।
जहां तक इसके आयोजन स्थल की बात है यह समारोह तानसेन के समाधि स्थल पर ही आयोजित किया जाता है लेकिन वर्ष भर यह स्थल अनदेखी का शिकार रहता है यहाँ शराबी अपना अड्डा जमाए रहते हैं। जिस समय समारोह आयोजित होता है उससे चंद रोज पहले ही प्रशासन को यहां की साफ सफाई की याद आती है।
इस संगीत समारोह की अनदेखी का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि इस गौरवशाली संगीत आयोजन और संगीत की अन्य गतिविधियों के लिए यहां वर्षों से प्रस्तावित संगीत सभागार आज तक अस्तित्व में नहीं आ सका है यही वजह है कि तानसेन समारोह को टेंट और तम्बू लगाकर आयोजित किया जाता है।