वक्फ कानून में बदलाव के लिए एक नया बिल कैबिनेट ने मंजूर कर लिया है, और यह बिल अगले हफ्ते संसद में पेश किया जा सकता है। नए संशोधनों के तहत, वक्फ बोर्ड अब जिन संपत्तियों पर दावा करेगा, उनका सत्यापन करना अनिवार्य होगा। इसी तरह, वक्फ की विवादित संपत्तियों का भी सत्यापन करना होगा। पूरे देश में वक्फ बोर्ड के पास बहुत सी संपत्तियां हैं, और यह माना जाता है कि सेना और रेलवे के बाद वक्फ बोर्ड के पास सबसे अधिक संपत्ति है।
सूत्रों ने कहा, ‘प्रस्तावित संशोधनों के अनुसार, वक्फ बोर्ड द्वारा संपत्तियों पर किए गए सभी दावों को अनिवार्य सत्यापन से गुजरना होगा. वक्फ बोर्ड द्वारा दावा की गई संपत्तियों के लिए एक अनिवार्य सत्यापन प्रक्रिया प्रस्तावित है.’ सूत्रों के मुताबिक, इन संशोधनों का बिल अगले हफ्ते संसद में पेश किए जाने की संभावना है. वक्फ बोर्ड लगभग 940,000 एकड़ में फैली लगभग 870,000 संपत्तियों की देखरेख करता है. साल 2013 में, यूपीए सरकार ने मूल वक्फ अधिनियम, 1995 में संशोधन के माध्यम से वक्फ बोर्ड के अधिकार को मजबूत किया था.
यह अधिनियम ‘औकाफ’ को रेगुलेट करने के लिए स्थापित किया गया था. एक वकीफ द्वारा दान की गई और वक्फ के रूप में नामित संपत्ति को ‘औकाफ’ कहते हैं. वकीफ उस व्यक्ति को कहते हैं, जो मुस्लिम कानून द्वारा पवित्र, धार्मिक या धर्मार्थ के रूप में मान्यता प्राप्त उद्देश्यों के लिए संपत्ति समर्पित करता है. प्रस्तावित संशोधनों का उद्देश्य केंद्रीय वक्फ परिषद और राज्य बोर्डों में महिलाओं का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करके समावेशिता को बढ़ाना है. उत्तर प्रदेश सरकार के पूर्व मंत्री और भाजपा नेता मोहसिन रजा ने कहा, ‘पूरे देश और समाज की मांग थी कि ऐसा कानून आना चाहिए. वक्फ बोर्ड ने 1995 के कानून का बहुत दुरुपयोग किया है.’