सुप्रीम कोर्ट में अब राजनीतिक दृष्टि से संवेदनशील अयोध्या राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद पर छह अगस्त से नियमित सुनवाई होगी. इस मामले में अब मध्यस्थता के जरिए समाधान की उम्मीद खत्म हो गई है. चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अगुवाई वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने कहा कि इस घटनाक्रम के मद्देनजर अब इस भूमि विवाद की छह अगस्त से रोजाना सुनवाई होगी. संविधान पीठ के अन्य सदस्यों में न्यायमूर्ति एस ए बोबडे, न्यायमूर्ति धनन्जय वाई चन्द्रचूड़, न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर शामिल हैं. मध्यस्थता समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि हिन्दू और मुस्लिम पक्षकार इस पेचीदा भूमि विवाद का समाधान नहीं खोज सके. यहां जानिए अब इस मामले में कैसे होगी सुनवाई और कितने दिनों में आ सकता है फैसला. बता दें कि वर्तमान चीफ जस्टिस 17 नवंबर को रिटायर हो रहे हैं.
- आरएसएस ने किया स्वागत
उधर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा रामजन्मभूमि मामले की नियमित सुनवाई करने के निर्णय का स्वागत किया है।। सुरेश (भय्याजी) जोशी, सरकार्यवाह, राष्ट्रीय स्वयंसेवक ने अपने वक्तव्य में कहा कि राम जन्मभूमि मंदिर निर्माण की बाधाएँ हटाने हेतु मध्यस्थता के प्रयास सफल होने की अपेक्षा थी, परन्तु नहीं हो पाए।
6 अगस्त से रोजाना सुनवाई करने के सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय का हम स्वागत करते हैं। और विश्वास व्यक्त करते हैं कि निश्चित समयावधि में बहुलम्बित विवाद हल होगा और मन्दिर निर्माण की कानूनी बाधाएं दूर होकर भव्य मंदिर निर्माण का कार्य शीघ्र प्रारंभ होगा।