आकाश तुम इतनी जल्दी हम सबको छोड़कर चले जाओगे यह तो किसी ने कल्पना तक नहीं की थी। अभी दो महीने भी नहीं हुए प्रसिद्ध पत्रकार संघ प्रचारक मामा माणिक चंद वाजपेयी की स्मृति में आयोजित कार्यक्रम का तुम्हारे द्वारा किया संयोजन तुम्हारी प्रतिभा योग्यता को परिलक्षित कर गया था । संघ के प्रचार विभाग में अपनी तमाम व्यस्तताओं के बावजूद मैंने आकाश को सदैव सक्रीय व ऊर्जा से परिपूर्ण ही देखा। आगे बढ़कर जिम्मेदारी को ग्रहण करना और सम्पूर्ण योग्यता के साथ उसे पूरा करना आकाश की पहचान बन गया था। वरिष्ठजनों का आदर व हंसते मुस्कराते कार्य में जुटे रहने वाले आकाश सक्सेना की मायूस कर देने वाली खबर पर सहसा विश्वास ही नहीं होता। गायों की सेवा और उसके लिए अपनी आजीविका के मूल साधन पत्रकारिता की नोकरी तक को तिलांजलि देकर आकाश ने पूरे समाज के सामने एक बड़ा उदाहरण प्रस्तुत किया था। गोवंश की सेवा जैसे उनका शौक था जब अखबार की नोकरी और गो सेवा इन दोनों में आकाश ने सदैव बेसहारा गौवंश की सेवा को ही प्राथमिकता दी। जब अखबार मालिकों ने गौसेवा या पत्रिकारिता किसी एक को चुनने के लिए कहा तो इस युवा पत्रकार ने आजीविका तक की चिंता नहीं की और गौसेवा के लिए नोकरी छोड़ दी। इसके बाद पत्रिकारिता को गौसेवा का साधन बनाकर आकाश ने शहर की लाल टिपारा और फिर रानीघाटी गौशाला को आदर्श बनाकर एक मिसाल कायम की। इसके लिए उन्होंने श्रम की पराकाष्ठा करके बड़ी लकीर खींची जो समाज के लिए लंबे समय तक प्रेरणा का काम करेगी। गौसेवा को समर्पित इस युवा व्यक्त्वि ने गौसेवा को समर्पित देश के पहले डिजिटल अखबार को भी प्रारंभ किया था शीघ्र ही वे इसका साप्ताहिक संस्करण प्रारंभ करने की योजना पर कार्य कर रहे थे इसके लिए उन्होंने सिटीसेंटर में एक कार्यस्थल भी प्रारंभ किया था। भूले नहीं भूलता कड़कड़ाती कोहरे भरी सर्दी में रात्रि दस बजे के आसपास आया आकाश का वो फोन जिसमें उन्होंने मुझसे कहा भाईसाहब आपको गौशाला की एक फोटो भेजी है। सर्दी से गौवंश मर रहा है कोई व्यवस्था नहीं है आप प्रशासन से बात करके खबर लगाओगे तो शायद प्रशासन यहां सर्दी से मर रहे गौवंश के लिए कुछ
अश्रुपूर्ण श्रद्धाजंलि : तुम्हें न भूल पाएंगे
इंतजाम कर दे। मेरा माथा घूम गया मैंने आकाश से कहा क्या इतनी कड़कड़ाती सर्दी में तुम गौशाला में हो। जवाब मिला भाईसाहब गायें मर रही हैं इन्हें बचाना है जितना बन सकता है में कर रहा हूँ लेकिन बिना प्रशासन के सहयोग के कुछ नहीं होने वाला आकाश की सक्रीयता रंग लाई और कलेक्टर ने पहले खुद के खर्चे पर और फिर प्रशासन व समाज के सहयोग से गौवंश के लिए जालियों,कंबलों आदि की व्यवस्था की तब जाकर आकाश को चैन आया। यह तो एक छोटा से प्रसंग है आकाश प्रतिदिन ऐसा ही कोई न कोई प्रेरणादायी कार्य करते सक्रीय दिखाई देते थे। जिस कोरोना महामारी से समाज को मुक्ति दिलाने के लिए हाल ही में आकाश ने रानीघाटी गौशाला में महामृत्युंजय पाठ के साथ भव्य यज्ञ कराया था उसी कोरोना के क्रूर दंश ने आकाश को आज हमसे छीन लिया है। आज लेखनी के पास न तो वो शब्द हैं न मस्तिष्क के पास वो मेधा जो आकाश के लिए कुछ लिख सके या बोल सके सब कुछ जैसे सन्निपात में चले गए हैं। जाओ आकाश हम कभी तुम्हारी इस बेवफाई पर तुम्हें माफ नहीं करंगे। प्रभु से प्रार्थना है की इस पवित्र आत्मा को अपने श्री चरणों में स्थान दे और उनके परिवार को यह असीम दुख सहन करने की शक्ति प्रदान करे।
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