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आइए याद करें देश के दो महान नेताओं बल्लभभाई और इंदिरा गांधी को

                                             विराग पाचपोरे

देश आज दो महान नेताओं का स्मरण कर रहा हैं. जिन्होंने स्वतंत्रता के तुरंत बाद सरे देश को एक सूत्र में पिरोया, एक देश-एक जन-एक राष्ट्र के भाव का स्मरण दिलाया ऐसे लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल और जिन्होंने पाकिस्तान के दो टुकड़े कर दिखाए, देश के शौर्य बल का परिचय को दुनिया के कराया ऐसी श्रीमती इंदिरा गाँधी.

सरदार पटेल ही वास्तविक इस देश के प्रधान मंत्री बनने वाले थे. १९४७ में जब सभी प्रान्तिक कांग्रेस समित्यों की राय पूछी गयी तो तीन को छोड़ कर सभी ने सरदार के पक्ष में मत प्रकट किया था. पर कांग्रेस में तो गाँधी की चलती थी. इसलीये ‘आखरी अंग्रेज’ ‘मेरा हिन्दू घराने में जन्म यह एक अपघात हैं’ ऐसी मान्यता रखनेवाले नेहरु को प्रधानमंत्री का ताज पहनाया गया.

सरदार पटेल जिस कांग्रेस पार्टी की दें थे उनको तो उनकी पार्टी ने लगभग नकार दिया हैं. भाजपा ने शुरू से ही सरदार का सम्मान किया हैं. अगर सरदार ना होते तो शायद ‘शांतिदूत’ नेहरु ने देश को पता नहीं कितने टुकड़ों में बाँट कर रख दिया होता. एक कश्मीर का मसला ही उनके कारण अभी तक उलझ नहीं पाया हैं. सरदार अगर कश्मीर को हाथ में लेते तो चित्र कुछ अलग होता. अब भी समय हैं. सरदार के राज्य से आनेवाले नेता के हत्थों में देश की बागडोर हैं तो हम उम्मीद रखते हैं की कश्मीर समस्या का समाधान जल्द ही निकल आयेगा.

इंदिरा गाँधी देश की पहली ऐसी नेता थी जिसने जहाँ कड़ी की आवश्यकता थी वहां दिखाई. फिर वो प्रिवी पर्स का मामला हो या बैंक राष्ट्रीयकरण का. पर सत्ता की भूख उनके अन्दर इस कदर थी की अपनी सत्ता बचने की होड़ में उन्होंने पहले तो कांग्रेस को तोड़ दिया फिर न्यायपालिका को ताक पर रख कर देश में आपातकाल लागु किया और सारे देश को जेल बना दिया. हजारो, लाखो निरपराध लोगों को जेल में ठूंस दिया, उनको भयंकर यातनाएं दी गयी और एक निरंकुश शासन का दौर चला. खैर, उनको इस भूल की सजा मिल ही गयी.

अस्सी के दशक में जब उनकी सत्ता में वापसी हुई तो सुवर्ण मंदिर का कांड हुआ. लेकिन आतंकवादियों को नेस्तनाबूत करने में वे हिचकिचाई नहीं. उसी के कारण उन्हें अपनी जन से भी हाथ धोना पड़ा था.

जो भी हो, सरदार पटेल और श्रीमती इंदिरा गाँधी देश के सपूत हैं और इसीलिए उनके स्मृति में हम सबने प्रणाम करना चाहिए. उनके जीवनी का अध्ययन करना चाहिए और उससे सीख लेकर हमारे देश को आगे कैसे ले जाया सकता हैं इसका विचार करना चाहिए.

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