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आज इस स्त्रोत के साथ करें मां लक्ष्मी की पूजा होती है विशेष कृपा

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शुक्रवार का दिन मां लक्ष्मी को समर्पित होता है। हिंदू धर्म में मां लक्ष्मी को धन की देवी कहा जाता है। मां लक्ष्मी की कृपा से व्यक्ति को जीवन में सभी तरह के सुखों की प्राप्ति होती है। शुक्रवार के दिन मां लक्ष्मी की विशेष पूजा- अर्चना की जाती है। इस दिन मां लक्ष्मी की पूजा- अर्चना करने से मां लक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

  • सबसे पहले स्नान आदि से निवृत्त हो जाएं।
  • घर और घर के मंदिर में अच्छी तरह से साफ- सफाई कर लें।
  • मां लक्ष्मी का वास उसी घर में होता है जहां साफ- सफाई का ध्यान रखा जाता है।
  • घर के मंदिर में दीप प्रज्वलित करें।
  • मां लक्ष्मी का जलाभिषेक करें।
  • सभी देवी- देवताओं का अभिषेक करें।
  • अगर संभव हो तो व्रत भी रखें।
  • मां लक्ष्मी को पुष्प अर्पित करें।
  • मां लक्ष्मी की आरती करें।
  • मां को खीर का भोग लगाएं।
  • मां लक्ष्मी के साथ ही भगवान विष्णु की पूजा भी करें।
  • इस दिन अधिक से अधिक मां लक्ष्मी का ध्यान करें।
  • विशेष कृपा प्राप्त करने के लिए श्री लक्ष्मीनारयण स्तोत्रं का पाठ जरूर करें

श्री लक्ष्मीनारयण स्तोत्रं

  • ध्यानम्

चक्रं विद्या वर घट गदा दर्पणम् पद्मयुग्मं दोर्भिर्बिभ्रत्सुरुचिरतनुं मेघविद्युन्निभाभम् ।

गाढोत्कण्ठं विवशमनिशं पुण्डरीकाक्षलक्ष्म्यो-रेकीभूतं वपुरवतु वः पीतकौशेयकान्तम् ॥ १॥

शंखचक्रगदापद्मकुंभाऽऽदर्शाब्जपुस्तकम्।

बिभ्रतं मेघचपलवर्णं लक्ष्मीहरिं भजे ॥२॥

विद्युत्प्रभाश्लिष्टघनोपमानौ शुद्धाशयेबिंबितसुप्रकाशौ।

चित्ते चिदाभौ कलयामि लक्ष्मी- नारायणौ सत्त्वगुणप्रधानौ ॥३॥

नित्यं युवाभ्यां नतिरस्तु लक्ष्मी-नारायणाभ्यां जगतः पितृभ्याम् ॥४॥

सम्पत्सुखानन्दविधायकाभ्यां भक्तावनाऽनारतदीक्षिताभ्याम् ।

नित्यं युवाभ्यां नतिरस्तु लक्ष्मी-नारायणाभ्यां जगतः पितृभ्याम् ॥५॥

नित्यं युवाभ्यां नतिरस्तु लक्ष्मी नारायणाभ्यां जगतः पितृभ्याम् ॥६॥

क्षीरांबुराश्यादिविराट्भवाभ्यां नारं सदा पालयितुं पराभ्याम् ।

नित्यं युवाभ्यां नतिरस्तु लक्ष्मी-नारायणाभ्यां जगतः पितृभ्याम् ॥७॥

दारिद्र्यदुःखस्थितिदारकाभ्यां दयैवदूरीकृतदुर्गतिभ्याम्

नित्यं युवाभ्यां नतिरस्तु लक्ष्मी-नारायणाभ्यां जगतः पितृभ्याम् ॥८॥

नित्यं युवाभ्यां नतिरस्तु लक्ष्मी-नारायणाभ्यां जगतः पितृभ्याम् ॥९॥

रक्तोत्पलाभ्राभवपुर्धराभ्यां पद्मारिशंखाब्जगदाधराभ्याम्।

नित्यं युवाभ्यां नतिरस्तु लक्ष्मी-नारायणाभ्यां जगतः पितृभ्याम् ॥१०॥

अङ्घ्रिद्वयाभ्यर्चककल्पकाभ्यां मोक्षप्रदप्राक्तनदंपतीभ्याम्।

नित्यं युवाभ्यां नतिरस्तु लक्ष्मी-नारायणाभ्यां जगतः पितृभ्याम् ॥११॥

इदं तु यः पठेत् स्तोत्रं लक्ष्मीनारयणाष्टकम्।

ऐहिकामुष्मिकसुखं भुक्त्वा स लभतेऽमृतम् ॥१२॥

।। इति श्रीकृष्णकृतं लक्ष्मीनारयण स्तोत्रं संपूर्णम् ।।

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