आज माघी अमावस्या को मौनी अमावस्या भी कहा जाता है। मान्यता के अनुसार इस दिन ऋषि मनु का जन्म हुआ था, इसलिए इसे मौनी अमावस्या कहा जाता है। इस दिन स्नान-दान का विशेष महत्व है। इस दिन मौन व्रत धारण करना चाहिए। अगर पूरे दिन का मौन व्रत नहीं रख सकते तो जहां बहुत आवश्यकता हो वहीं बोलें। बहुत धीरे और मीठे स्वर में बोलें।
इस दिन पवित्र नदी में स्नान अवश्य करना चाहिए। उगते हुए सूर्य को अर्घ्य दें। ऐसा करने से पितरों को भी इसका शुभफल प्राप्त होता है। मौनी अमावस्या के दिन भगवान विष्णु की पूजा करने से सभी प्रकार के सुखों की प्राप्ति होती है। मौनी अमावस्या पर निस्वार्थ भाव से दान दें। इस दिन दिए दान का फल कई जन्मों तक प्राप्त होता है। मौनी अमावस्या पर तिल के लड्डू, तिल का तेल, आंवला, कपड़े आदि का दान करें। इस दिन घर में कलह का माहौल न बनने दें। विवादों से दूर रहें। किसी से झूठ न बोलें और न ही किसी को कटु वचन कहें। मौनी अमावस्या का व्रत रखने वाले किसी प्रकार का शृंगार न करें। बिना स्नान कर भोजन न करें। शीतल जल से स्नान करें। तामसिक भोजन से दूर रहें। इस दिन काले तिल के लड्डू बनाकर गाय को अवश्य खिलाना चाहिए। इस दिन किसी भी पशु या व्यक्ति को परेशान नहीं करना चाहिए। न ही किसी का अपमान करना चाहिए। इस दिन भगवान विष्णु और भगवान शिव की आराधना करें। चींटियों को शक्कर मिला हुआ आटा खिलाएं।