प्रवीण दुबे
आज आपातकाल की 50 वीं वर्षगांठ पर ग्वालियर के मीसाबंदियों से जुड़ा रिकॉर्ड कांग्रेस द्वारा नष्ट किए जाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है।
इस बात का खुलासा किया है मीसाबंदियों के अखिल भारतीय संगठन लोकतंत्र सेनानी संघ की मध्यप्रदेश शाखा के प्रदेश उपाध्यक्ष मोहन विटवेकर ने शब्दशक्ति न्यूज़ से विशेष बातचीत में जब श्री विटवेकर से सवाल किया गया कि ग्वालियर में आपातकाल के दौरान ग्वालियर जेल में बंदी बनाकर रखे गए नेताओं की अधिकृत सूची क्या है ? इस सूची को ग्वालियर जेल के बाहर प्रदर्शित करने की योजना को 50 वर्ष के बावजूद अमल में क्यों नहीं लाया गया है ?
इसके जवाब में श्री विटवेकर ने बताया कि जब उन्हें जेल डायरेक्टर नियुक्त किया गया था तभी से वे इसके लिए प्रयासरत रहे इस दौरान जेल प्रशासन से उन्हे पता लगा कि जिस समय दिग्विजय सरकार सत्तासीन थी उस समय एक सुनियोजित षडयंत्र के अंतर्गत ग्वालियर से जुड़ा मीसाबंदियों का पूरा रिकॉर्ड भोपाल मंगाया गया था इसके बाद एक सुनियोजित योजना के अनुसार उस रिकॉर्ड को नष्ट करा दिया गया।
श्री विटवेकर ने कहा कि कांग्रेस को भय था कि आने वाले समय में
यह रिकॉर्ड कांग्रेस के लिए परेशानी खड़ी कर सकता है।
श्री विटवेकर ने बताया कि इस खुलासे के बावजूद जेल प्रशासन ने कुछ बचे खुचे दस्तावेज उपलब्ध भी कराये जिन्हे ठीक से न रखे जाने के कारण दीमक चट कर गई थी।
यह पूछे जानेपर कि ग्वालियर में अधिकृत रूप से कितने लोगों को मीसाबंदी बनाया गया था तो उन्होंने बताया कि लोकतंत्र सेनानी संघ के पास संभाग भर के करीब 120 लोगों की सूची है जो मीसा बंदी रहे थे।
जब जब राजमाता सिंधिया सहित दो महारानियों को भी बनाया गया था बंदी

आज भारत के लोकतंत्र के सबसे अंधेरे अध्याय आपातकाल की घोषणा के 50 साल पूरे हुए हैं. उस दिन भारतीय संविधान के मूल्यों को कुचला गया. मौलिक अधिकार छीन लिए गए. प्रेस की आजादी खत्म कर दी गई. उसी दौर की एक कहानी है जब दो महारानियों को जेल भेजा गया था
जेल में दोनों महारानियों को एक ही कमरे में रखने की योजना बनी लेकिन गायत्री देवी ने इसका विरोध किया. उन्होंने कहा कि उनकी जीवनशैली और आदतें अलग हैं. उनकी बात मानी गई और दोनों को अलग-अलग कोठरियों में रखा गया. गायत्री देवी को किताबें पत्रिकाएं और रेडियो की सुविधा मिल गई थी. वहीं विजयाराजे सिंधिया ने जेल की बदतर स्थिति का जिक्र अपनी आत्मकथा प्रिंसेज’ में किया है. कैसे खाने के समय मक्खियों से बचाव करना पड़ता था और रात में मच्छरों से. उन्हें शुरू में किसी से मिलने नहीं दिया गया.
बीमार पड़ीं.. एम्स में भर्ती किया गया
विजयाराजे सिंधिया जब बीमार पड़ीं तो उन्हें एम्स में भर्ती किया गया जहां से उन्हें पेरोल पर छोड़ा गया. विजयाराजे सिंधिया की तीनों बेटियां उन्हें लेने जेल के बाहर मौजूद थीं.
Praveen dubey @ shabdshakti news. in