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एथेनॉल युक्त पेट्रोल : सरकार ने सोशल मीडिया पर वायरल दावों को बताया फर्जी और भ्रामक कहा घबराने की जरूरत नहीं

नई दिल्ली 4 जुलाई 2026/पेट्रोल में 20 फीसदी एथेनॉल (E20) मिलाने को लेकर सोशल मीडिया पर कई तरह के दावे किए जा रहे हैं. कहीं इंजन खराब होने की बात कही जा रही है तो कहीं बीमा रद्द होने का दावा किया जा रहा है. अब सरकार ने इन सभी अफवाहों पर विस्तार से जवाब दिया है. पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने 10 बिंदुओं में साफ किया है कि E20 कार्यक्रम वैज्ञानिक रिसर्च और दुनिया के कई देशों के अनुभव पर आधारित है. मंत्रालय का कहना है कि सोशल मीडिया पर फैलाए जा रहे ज्यादातर दावे भ्रामक हैं और वाहन मालिकों को घबराने की जरूरत नहीं है.

सरकार के मुताबिक, E20 पेट्रोल पर कई रिसर्च और टेस्टिंग की जा चुकी है. दुनिया के कई देशों में भी लंबे समय से इसका इस्तेमाल किया जा रहा है. मंत्रालय ने कहा कि E20 पेट्रोल से इंजन खराब होने, कार के पार्ट्स को नुकसान पहुंचने या इंश्योरेंस खत्म होने जैसी बातों का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है. लोगों को सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे दावों पर भरोसा करने की बजाय ऑफिशियल चीज पर भरोसा करना चाहिए.

सरकार ने सब किया क्लियर

एथेनॉल बनाने में पानी की बर्बादी को लेकर भी सरकार ने स्थिति साफ की है. सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा था कि एक लीटर एथेनॉल बनाने में करीब 10,000 लीटर पानी खर्च होता है, लेकिन मंत्रालय ने इसे पूरी तरह गलत बताया है. सरकार का कहना है कि एथेनॉल प्लांट में एक लीटर एथेनॉल बनाने के लिए केवल 3 से 5 लीटर पानी की जरूरत पड़ती है और इस पानी का भी दोबारा यूज किया जाता है. इसके अलावा अब बड़ी मात्रा में एथेनॉल मक्के से तैयार किया जा रहा है, जिसकी खेती में धान की तुलना में काफी कम पानी लगता है.

गाड़ियों पर E20 पेट्रोल के प्रभाव को लेकर सरकार ने ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI) का भी हवाला दिया. इन टेस्टिंग में कारों को 40,000 किलोमीटर और टू-व्हीलर्स को करीब 20,000 किलोमीटर तक चलाकर जांचा गया. रिपोर्ट में पाया गया कि E20 पेट्रोल से गाड़ी की परफॉर्मेंस या माइलेज पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ता. कुछ मामलों में माइलेज में मामूली अंतर जरूर देखा गया, लेकिन इंजन पर इसका नकारात्मक प्रभाव नहीं मिला. हालांकि, बहुत पुरानी गाड़ियों में रबर के कुछ हिस्सों को समय से पहले बदलने की जरूरत पड़ सकती है.

इन दावों को बताया फर्जी

सरकार ने सोशल मीडिया पर वायरल कुछ दूसरे दावों को भी पूरी तरह फर्जी बताया. कुछ वीडियो में कहा जा रहा था कि E20 पेट्रोल में चीनी होने की वजह से चींटियां और मधुमक्खियां गाड़ियों की ओर आकर्षित होती हैं. मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि एथेनॉल तैयार करने के प्रोसेस में चीनी पूरी तरह अलग कर दी जाती है और फ्यूल में ऐसे तत्व मिलाए जाते हैं जो कीड़ों को दूर रखते हैं. इसलिए ऐसे दावों का कोई आधार नहीं है.

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