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कहीं शिवराज की तरह कमलनाथ के लिए भी सिरदर्द न बन जाएं किसान

भोपाल

बीते वर्ष  विधानसभा चुनाव से ठीक पहले पूर्व मुख्यमंत्री का सिरदर्द बने किसान एक बार फिर अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर उतर आए यदि वर्तमान की कमलनाथ सरकार ने इन्हें गम्भीरता से नहीं लिया तोयह शिवराज की तरह कमलनाथ की परेशानी भी बढ़ा सकते हैं। राजधानी के नीलम पार्क में किसान महापंचायत में जुटे प्रदेशभर के किसानों ने एक स्वर में स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू करने सहित अन्य मांगों को पूरा करने की मांग की। इसके बाद मुख्यमंत्री कमलनाथ के नाम संबोधित ज्ञापन कलेक्टर को सौंपा। यह प्रदर्शन भारतीय किसान यूनियन के तत्वावधान में किया गया। इसके पहले सुबह 11 बजे प्रदेशभर से सैकड़ों की संख्या में किसान पार्क में एकत्र हुए।

किसानों का कहना है कि वह अपनी मांगों का निराकरण को लेकर किसान संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन उनकी मांगों का निराकरण नहीं हुआ। महापंचायत में प्रदेशभर के किसान प्रतिनिधि और किसान शामिल हुए। इस दौरान मांगों को लेकर प्रस्ताव पारित किया गया। इस संबंध में 22 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन मुख्यमंत्री के नाम सौंपा गया। महापंचायत में राष्ट्रीय प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत, उपाध्यक्ष राजेश चौहान, बलराम सिंह लम्बरदार, चौधरी दीवानचंद, राजपाल शर्मा, प्रदेशाध्यक्ष जगदीश सिंह सहित प्रदेश के किसान मौजूद थे।
ये हैं 22 सूत्रीय मांगें
स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू करने के लिए प्रदेश सरकार विधानसभा में प्रस्ताव पारित कर केंद्र को भेजने, तेलंगाना की तर्ज पर आठ हजार रुपए प्रति एकड़ प्रति वर्ष किसानों को सब्सिडी, बरगी परियोेजना को समय पर पूरा करने, किसानों के प्रकरण समय सीमा में निराकृत करने, जिले में स्थापित उद्योग, कारखानों में योग्यता के आधार पर स्थानीय बेरोजगारों को 75 फीसदी रोजगार देने, पिछले खरीब की अतिवृष्टि से प्रभावित फसलों के नुकसान की भारपाई, मंडी चुनावों में आवेदन करते समय किसान होने का प्रमाण-पत्र जमा कराने, पिछले वर्ष की भावांतर राशि देने, किसानों का 2 लाख तक कर्ज माफ करने, दूध उत्पादक किसानों को पांच रुपए प्रति लीटर बोनस देने, धान का भुगतान, बिजली बिल माफ करने, सामाजिक सुरक्षा पेंशन एक हजार करने आदि शामिल है।
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