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गुरू तेग बहादुर के 350 वें शहीदी पर्व के उपलक्ष्य में कार्यक्रम (व्याख्यान) हिन्द की चादर” का आयोजन  02 दिसम्बर को

ग्वालियर 30 नवंबर 2025/श्री गुरू तेगबहादुर जी महाराज के 350 वें शहीदी पर्व के उपलक्ष्य में श्री गुरू तेगबहादुर जी महाराज के धर्म और देश की रक्षा के लिए की गयी अनोखी व अप्रतिम शहादत को समर्पित एक अलौकिक कार्यक्रम (व्याख्यान) हिन्द की चादर” का आयोजन दिनांक  02 दिसम्बर 2025, मंगलवार को  सायं 04:30 बजे से ‘बाल भवन’ रूपसिंह स्टेडियम के पास, ग्वालियर में  किया जा रहा है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता बाबा गुरप्रीत सिंह जी गुरूद्वारा दाता बन्दी छोड़ ग्वालियर द्वारा की जाएगी,
मुख्यवक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह क्षेत्र प्रचारक श्रीमान प्रेमशंकर जी होंगे कार्यक्रम के सूत्रधार डॉ. ए. एस. भल्ला,सदभावना संयोजक पवन शर्मा ने समस्त गणमान्य जनों से कार्यक्रम में उपस्थित रहने का आग्रह किया है।
कौन थे गुरु तेग बहादुर
गुरु तेग बहादुर सिखों के नौवें गुरु थे, जिन्हें व्यापक रूप से ‘हिंद की चादर’ (भारत की ढाल) के रूप में सम्मानित किया जाता है। उन्होंने धार्मिक स्वतंत्रता और मानवीय मूल्यों की रक्षा के लिए 1675 में मुगल सम्राट औरंगजेब के आदेश पर अपने जीवन का सर्वोच्च बलिदान दिया।
औरंगजेब के शासनकाल के दौरान जबरन धर्म परिवर्तन और धार्मिक उत्पीड़न के चरम पर, गुरु तेग बहादुर ने कश्मीरी पंडितों के अधिकारों के लिए आवाज उठाई। उन्होंने इस्लाम धर्म अपनाने से इनकार कर दिया, जिसके परिणामस्वरूप उन्हें 24 नवंबर 1675 को दिल्ली के चांदनी चौक में सार्वजनिक रूप से अपना बलिदान दिया 
उनकी शहादत ने धार्मिक स्वतंत्रता के महत्व को स्थापित किया और उनके बेटे, गुरु गोबिंद सिंह को सिखों को खालसा (Khalsa) के रूप में संगठित करने के लिए प्रेरित किया, जो सच्चाई और न्याय के लिए लड़ने वाले योद्धा-संत थे। 
गुरुद्वारा सीस गंज साहिब और गुरुद्वारा रकाब गंज साहिब दिल्ली में उनका बलिदान और उनका अंतिम संस्कार किया गया था।
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