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ग्वालियर निगम सभापति पद पर भाजपा के मनोज तोमर की जीत,कांग्रेस को 1 वोट से शिकस्त

जैसी की सम्भावना थी परिणाम वैसा ही आया भाजपा ग्वालियर नगरनिगम में अपना सभापति बनाने में कामयाब रही । मनोज तोमर ग्वालियर नगरनिगम सभापति चुनाव में 1 वोट से जीत गए। उन्हें केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर का नजदीकी माना जाता है। लेकिन अच्छी बात था दिखाई दी कि श्री तोमर को लेकर भाजपा के सारे धड़े अर्थात ज्योतिरादित्य सिंधिया से लेकर विवेक शेजवलकर तक सभी एकराय बनाने में कामयाब हुए।उल्लेखनीय है कि 57 साल बाद महापौर की सीट गंवाने वाली भाजपा किसी भी तरह से सभापति की कुर्सी गंवाना नहीं चाहती थी इसके लिए उसने ग्वालियर से लेकर दिल्ली तक एड़ी चोटी का जोर लगाया और  अंत में केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर समर्थक मनोज तोमर को नगर निगम सभापति बनाने में कामयाब हो गई।

भाजपा प्रत्याशी मनोज तोमर को 34 वोट मिले जबकि कांग्रेस की प्रत्याशी लक्ष्मी सुरेश गुर्जर को 33 वोट मिले और वो मात्र एक वोट से सभापति का चुनाव हार गई। कलेक्टर एवं पीठासीन अधिकारी कौशलेन्द्र विक्रम सिंह ने सभापति पद पर मनोज तोमर को विजयी घोषित किया।

गौरतलब है कि सभापति की कुर्सी पाने के लिए क्रॉस वोटिंग के डर से नूराकुश्ती में लगे भाजपा और कांग्रेस दोनों पार्टियों के पार्षद पर्यटन बाड़ाबंदी के बीच देर रात ग्वालियर लौट आये,  इन्हें रात को होटल आदित्याज में ठहराया गया। भाजपा ने जिला अध्यक्ष कमल माखीजानी के नेतृत्व में जहाँ अपने पार्षदों को सुरक्षित रखने के लिए हरियाणा के रेवाड़ी के हंस रिसोर्ट का आनंद करवाया  और दिल्ली में केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, ज्योतिरादित्य सिंधिया, सांसद विवेक शेजवलकर से मुलाकात करवाई, प्रदेश सरकार के ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर और ग्वालियर के प्रभारी मंत्री तुलसीराम सिलावट भी उनके साथ ही रहे।

उधर भाजपा की राह पर कांग्रेस भी चली, विधायक डॉ सतीश सिंह सिकरवार, जिला अध्यक्ष डॉ देवेंद्र शर्मा और वरिष्ठ नेता अशोक सिंह के नेतृत्व में कांग्रेस के पार्षदों ने ओरछा का पर्यटन किया और देर रात ग्वालियर लौटकर अशोक सिंह के होटल सेन्ट्रल पार्क में रात बिताई।

कुल मिलाकर महापौर सीट पर कांग्रेस के हाथों 57 साल बाद करारी शिकस्त झेलने वाली भाजपा ने नगर निगम में अपना सभापति बनाकर थोड़ी साख जरूर बचा ली है। अब देखना ये होगा कि कांग्रसी महापौर की एमआईसी द्वारा शहर विकास से जोड़े कितने प्रस्तावों को परिषद् में बहुमत मिलता कितने वापस होते हैं।

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