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ग्वालियर में कहीं राहुल की विनिंग डिप्लोमेसी का शिकार न हो जाए भाजपा

क्या ग्वालियर का लोकसभा मुकाबला एकबार पुनः महल और सामान्यजन के बीच होने जा रहा है ? हालांकि दोनों ही दलों ने अभी अपने प्रत्याशी घोषित नहीं किये हैं लेकिन जिस प्रकार के संकेत मिल रहे हैं उससे इसबात की सम्भावना प्रबल होती दिखाई दे रही है।

यह कहा जा रहा है कि कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और गुना संसदीय क्षेत्र के सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया की पत्नी प्रियदर्शिनी राजे को ग्वालियर लोकसभा सीट से उम्मीदवार बनाए जाने को लेकर पार्टी में गम्भीरता से विचार चल रहा है।

उल्लेखनीय है कि प्रियदर्शिनी का सीधा सम्बन्ध ग्वालियर राजघराने से  है। यह भी बताना उपयुक्त होगा कि आजादी के बाद से ही देश की राजनीति में ग्वालियर राजघराना और उससे जुड़े जयविलास पैलेस का खासा दबदबा रहा है।

इसी राजघराने की राजमाता विजयाराजे सिंधिया हिन्दू महासभा कांग्रेस और फिर जनसंघ भाजपा से राजनीति में जीत का परचम लहराती रहीं,एक समय तो राजमाता ने अपने ही दमपर  मुख्यमंत्री द्वारकाप्रसाद मिश्र की कांग्रेस सरकार को घुटने टेकने पर मजबूर करते हुए सम्बित सरकार का गठन करने में अहम भूमिका निभाई थी।

 

इतना ही नहीं बाद में राजमाता के पुत्र माधवराव सिंधिया ने अटलजी की उपस्थिति में जनसंघ से अपने राजनीतिक कैरियर की शुरुआत की थी हालांकि बाद में वे कांग्रेस में  चले गए और सफलता के कई सोपान गढ़े।

इतना ही नहीं जयविलास में पली बढ़ी राजमाता की पुत्री वसुंधराराजे राजस्थान की मुख्यमंत्री रहीं, एक अन्य पुत्री यशोधरा राजे मध्यप्रदेश की भाजपा सरकार में मंत्री रहीं। वर्तमान में स्व. माधवराव सिंधिया के पुत्र ज्योतिरादित्य का कांग्रेस के भीतर जोरदार दबदबा किसी से छुपा नहीं है।

अब जबकि कांग्रेस की कमान राहुल गांधी के हाथ है और यह लोकसभा चुनाव उनके भविष्य के लिए करो या मरो की स्थिति जैसा बन गया है, ऐसे हालात में यह कहा जा रहा है कि राहुल गांधी हर उस प्रत्याशी पर दांव खेलने का मन बना चुके हैं जो पार्टी को जीत दिलाने की क्षमता रखता है ।

यही वजह है कि कांग्रेस के लिए जहां ज्योतिरादित्य अपनी परम्परागत सीट गुना शिवपुरी से उतरेंगे वहीं राहुल गांधी की विनिंग डिप्लोमेसी के अन्तर्गत ज्योतिरादित्य की पत्नी प्रियदर्शिनी को ग्वालियर से मैदान में उतारने की जोरदार चर्चा है। हालांकि की ज्योतिरादित्य सहित कांग्रेस के किसी भी नेता ने अभीतक इसकी पुष्टि नहीं की है। लेकिन प्रियदर्शिनी ने पिछले कुछ दिनों में जिस प्रकार की सक्रीयता दिखाई है उससे उनके चुनावी समर में उतरने की बात को बल मिल रहा है।

दूसरी और भाजपा की बात करें तो पार्टी ग्वालियर से वर्तमान सांसद व मोदी केबिनेट के वजनदार मंत्री नरेंद्र तोमर को ग्वालियर से उतारने का लगभग मन बना चुकी है हालांकि भाजपा के पास भी यशोधरा राजे के रूप में  महल से जुड़ा नाम प्रत्याशी के रूप में है लेकिन जैसी की महल की परम्परा रही है वहां से दो प्रत्याशी कभी आमने सामने नहीं आते यदि प्रियदर्शिनी को कांग्रेस प्रत्याशी बनाती है तो महल से जुड़ी यशोधरा राजे कभी सामने नहीं आएंगी। ऐसे हालात में  नरेंद्र तोमर को ही पार्टी प्रत्याशी बनाएगी।

यह निश्चित ही भाजपा के लिए परेशानी का कारण होगा। महल के सामने भाजपा के जमीनी नेता के टिक पाने की उम्मीद नहीं के बराबर है। कौन भूल सकता है 1984 के उस लोकसभा चुनाव को जब देश के सबसे लोकप्रिय नेता अटलबिहारी वाजपेयी को महल राजनीति ने शिकार बनाकर हारने पर मजबूर कर दिया था।

 

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