एससी-एसटी एक्ट में संशोधन के बाद मध्यप्रदेश के आधे से ज्यादा जिलों में बवाल मचा हुआ है।आज ग्वालियर में सवर्णों द्वारा आयोजित सम्मेलन में जोरदार भीड़ उमड़ने और देश के जानेमाने कथावाचक देवकीनंदन महाराज के खुलकर सामने आने के बाद पुलिस प्रशासन की परेशानी बढ़ गई है।
ग्वालियर में आयोजित विरोध सम्मेलन में देवकीनंदन महाराज के अलावा करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष सहित तमाम सामाजिक धार्मिक संगठनों के शीर्ष नेतृत्व का गुस्सा पूरे उफान पर दिखाई दिया। देवकीनंदन महाराज ने साफ तौर पर कहा कि राजनीतिक उद्देश्य के लिए समाज को तोड़ने वाली किसी भी गतिविधियों को स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार को तुरंत य कानून वापस लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि दुनिया के किसी भी देश में ऐसा कोई कानून नहीं हैं जिसमें बिना जांच के सीधी गिरफ्तारी का प्रावधान हो। उन्होंने साफ तौर पर चेतावनी दी कि यदि इसे वापस नहीं लिया तो 2019 में देश की जनता इसका जवाब देगी। इसके साथ ही उन्होंने आंदोलन के दौरान किसी प्रकार की हिंसा तोड़फोड़ न करने की शर्त पर ही इस आंदोलन को उनके समर्थन की बात कही।
सरकार की चिन्ता बढ़ी
रविवार देर रात सीधी जिले की चुरहट में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के रथ पर पथराव के बाद सरकार चिंतित हो गई है। इस आंदोलन से भाजपा और कांग्रेस के नेताओं में घबड़ाहट दिखाई दे रही है। वहीं सुरक्षा के मद्देनजर कथित भारत बंद को लेकर पुलिस मुख्यालय ने अलर्ट जारी किया है| पुलिस महानिरीक्षक कानून व्यवस्था मकरंद देउस्कर ने मंगलवार को बताया कि एक्ट में संशोधन को लेकर सवर्ण समाज का विरोध अब तक मंदसौर, नीमच, ग्वालियर जैसे कुछ शहरों में रैली के रूप में हुआ है। प्रदेश के ग्वालियर-चंबल और उज्जैन संभा
ग में विरोध के स्वर तीखे बताए जा रहे हैं। वहीं, कटनी, सतना, जबलपुर, रीवा, विदिशा, हरदा, बदनावर, सागर, टीकमगढ़, मंडला, श्योपुर जैसे जिलों में भी एट्रोसिटी एक्ट संशोधन को लेकर नाराजगी स्वरूप विरोध प्रदर्शन हुए हैं।
दरअसल, पिछले 4-5 दिन में एससी-एसटी एक्ट में संशोधन के खिलाफ आंदोलन में गति पकड़ ली है। मप्र के 25से ज्यादा जिलों में आंदोलन फेल चुका है। खास बात यह है कि राज्य मंत्रालय में बैठकर सपाक्स और अपाक्स जैसे संगठन चलाने वाले आईएएस अधिकारी भी इस आंदोलन को अपने-अपने स्तर पर हवा दे रहे हैं। सपाक्स ने कई जिलों में 6 सितंबर को बंद का आह्वान किया है। देउस्कर ने बताया कई सनगतानों ने भारत बंद का आव्हान किया गया है जो केवल सोशल मीडिया पर चल रहा है। होशंगाबाद और कुछ अन्य स्थानों पर इक्का-दुक्का संगठनों ने बंद की सूचना प्रशासन को दी है। अभी इंटरनेट निलंबन जैसी आवश्यकता महसूस नहीं की जा रही है। फिर भी जिलों को जन्माष्टमी के दौरान उपलब्ध कराई गई पुलिस फोर्स को वापस नहीं लिया गया है। वे भारत बंद में कानून व्यवस्था के लिए उपयोग कर सकते हैं।
इन जिलों में लागू धारा 144
सभी जिलों के कलेक्टर और एसपी को स्तिथि के अनुरूप धारा 144 लगाने के निर्देश दिए हैं| कई जिलों में धारा 144 लागू भी कर दी गई है| छतरपुर जिले में धारा 144 लागू कर दी गई ,6 तारीख को होने वाले एससी ,एसटी एक्ट के खिलाफ आंदोलन को लेकर कलेक्टर ने धारा 144 लगाईं है, वहीं ग्वालियर जिले में 11 सितम्बर तक सभी शस्त्र लायसेंस निलंबित किये गए हैं| गुना में 5 तारीख से 7 तारीख दोपहर 12:00 बजे तक धारा 144 लागू की गई है| मुरैना, भिण्ड एवं शिवपुरी में एहतियाती तौर पर आज धारा 144 तत्काल प्रभाव से लगा दी गई है। यह 7 सितम्बर तक प्रभावी रहेगी।
यह समाज हुए एक
मध्यप्रदेश में क्षत्रीय महासभा, यादव महासभा, गुर्जर महासभा, वैश्य महासभा, कायस्थ महासभा, कुशवाह महासभा सहित अनेक सामाजिक संगठन इस आंदोलन के खिलाफ एकजुट हो गए हैं। यह सामूहिक बैठकें करके 8 सितम्बर को भारत बंद को लेकर तैयारियों में जुट गए हैं।
शहर, गांव, मोहल्लों में बैनर
मध्यप्रदेश के लगभग आधे शहरों, गांवों और मोहल्लों में लोगों ने अपने घरों के बाहर ैबनर लगाना शुरू कर दिया है कि हम सामान्य, पिछड़ा वर्ग के हैं नेता हमारे यहां वोट मांगने न आएं।