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ग्वालियर में हमने उजाड़ दिया जिस चिड़िया का घर उसको बचाने सुप्रीम कोर्ट ने दिया बड़ा आदेश

प्रवीण दुबे
80 और 90 के दशक में ग्वालियर,शिवपुरी के निकट घाटीगांव करैरा आदि इलाकों में बहुतायत में पाई जाने वाले देश के सर्वाधिक सुंदर पक्षी को मध्यप्रदेश की तत्कालीन सरकार और उसकी नौकरशाही के नाकारापन के कारण   समाप्त मानकर उसके लिए यहां बनाए गए  अभयारण्य को खतम कर दिया था अब उसी पक्षी को बचाने देश के सर्वोच्च न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट) ने  राजस्थान का लगभग 14,032 वर्ग किलोमीटर ‘प्रायोरिटी एरिया’ को पूरी तरह से संरक्षित किए जाने के निर्देश दिए हैं ताकि इस सुंदर और दुर्लभ पक्षी को बचाया जा सके।
उल्लेखनीय है कि सोन चिरैया  अर्थात ग्रेट इंडियन बस्टर्ड  एक बहुत सुंदर चिड़िया है और इस सुंदर चिड़िया ने  90 के पूर्व घाटीगांव करेरा आदि के पथरीले जंगलों को अपना घर बना रखा था चूंकि यह लुप्तप्राय दुर्लभ पक्षी की श्रेणी में आता है अतः इसके संरक्षण हेतु मध्यप्रदेश के इस इलाके में 1981 में“सौन चिरैया (ग्रेट इंडियन बस्टर्ड)  अभयारण्य की स्थापना की गई थी जब यहाँ सौन चिरैया देखी जा रही थी।
अभयारण्य के बनते ही यहां तैनात सरकारी अमले की बल्ले बल्ले हो गई सौन चिरैया के नाम पर लाखों के काजू किशमिश उड़ाये जाने लगे सौन चिरैया के संरक्षण पर किसी ने ध्यान नहीं दिया परिणाम यह हुआ अधिकारियों,भू माफियाओ,खदान माफियाओं की आवाजाही के कारण सौन चिरैया  यहां से पलायन कर गई बाद में इस सौन चिरैया (ग्रेट इंडियन बस्टर्ड)  अभयारण्य को समाप्त घोषित कर दिया गया। हालांकि कई पक्षी विशेषज्ञ इसके यहां होने का दावा करते रहे हैं।
सोन चिरैया  अर्थात ग्रेट इंडियन बस्टर्ड 
अब देश के सर्वोच्च न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट) ने राजस्थान के इस राज्य पक्षी जिसे वहां गोडावण कहा जाता है की सुरक्षा को लेकर अहम फैसला सुनाया है।
 सुप्रीम कोर्ट ने गोडावण पक्षी (ग्रेट इंडियन बस्टर्ड) को लेकर लक्ष्मण रेखा खींच दीं। कोर्ट ने साफ किया है कि गोडावण के संरक्षण वाले 14,032 वर्ग किलोमीटर ‘प्रायोरिटी एरिया’ को पूरी तरह से संरक्षित किया जाएगा। इस क्षेत्र में दो मेगावाट से बड़े सोलर और विंड प्रोजेक्ट नहीं लग सकेंगे, और सभी ओवरहेड ट्रांसमिशन लाइनें भूमिगत करनी होंगी। इस आदेश से कई कंपनियों के बड़े प्रोजेक्ट्स पर रोक लग जाएगी, जबकि जिन ट्रांसमिशन लाइनों के काम जारी हैं, उन्हें बीच में ही रोकना होगा। सुप्रीम कोर्ट ने जिस गोडावण के लिए अहम फैसला सुनाया
कभी ग्वालियर शिवपुरी के जंगलों में जिस  सुंदर पक्षी (ग्रेट इंडियन बस्टर्ड) की बड़ी संख्या थी उसकी स्थिति वर्तमान में अत्यंत चिंताजनक है। विशेषज्ञों के आंकड़ों के अनुसार, अब राजस्थान राज्य में मात्र 150 से 175 गोडावण ही शेष रह गए हैं। इनमें से अधिकांश पक्षी जैसलमेर के डेजर्ट नेशनल पार्क और उसके आसपास के इलाकों में पाए जाते हैं। अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (IUCN) ने इसे ‘अति संकटग्रस्त’ श्रेणी में रखा है, जिसका सीधा अर्थ है कि यह पक्षी विलुप्त होने की कगार पर खड़ा है।
ग्रेट इंडियन बस्टर्ड को उसके माथे पर काले ‘ताज’ से आसानी से पहचाना जा सकता है, जो उसकी हल्की गर्दन और सिर से अलग दिखता है। शरीर भूरा होता है और पंखों पर काले, भूरे और ग्रे रंग के निशान होते हैं। नर और मादा आमतौर पर एक ही ऊंचाई और वजन के होते हैं, लेकिन नर के सिर पर बड़ा काला ताज और छाती पर एक काली पट्टी होती है
करैरा (सोन चिरैया) अभयारण्य में “सौन चिरैया (ग्रेट इंडियन बस्टर्ड)” की अंतिम दर्ज sightings का क्रम इस प्रकार रहा है:
1981 – अभयारण्य की स्थापना की गई थी जब यहाँ सौन चिरैया देखी जा रही थी।
1986 तक – शोधकर्ताओं और वन विभाग ने कई बस्टर्ड देखे थे।
1991 – शोधकर्ताओं द्वारा अंतिम वैज्ञानिक पुष्टि की गई कि पक्षी यहाँ देखा गया था।
1992–1993 – स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार 1992 या 1993 के आसपास ही आखिरी बार  लोगों ने इसे देखा था।
1993 के बाद – कोई विश्वसनीय sighting दर्ज नहीं हुई; इसी वजह से अभयारण्य के संरक्षण की उपयोगिता पर सवाल उठे। इसे बंद कर दिया गया।
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