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जिला अस्पताल में कोविड मरीज के साथ की गई ऐसी गम्भीर लापरवाही की चली गई जान

लाखों करोड़ों की चिकित्सा सुविधाएं, अरबों की सर्वसुविधायुक्त इमारतें , स्टाफ को करोड़ों की पगार बावजूद इसके   जिम्मेदारी का ठीक से निर्वहन नहीं करने व लापरवाही बरतने की आदतों ने तमाम सरकारी अस्पतालों ,चिकित्सा केंद्रों की तस्वीर  कसाईखाने जैसी करके रख दी है । सरकार रुग्ण मानवता को इलाज के लिए यहां सब कुछ सहायता करती है लेकिन यहां तैनात स्टाफ डाक्टर से लेकर नर्स और वार्डबॉय से लेकर सफाई कर्मी तक किसी मनमाने इंसान से कम नजर नहीं आते। ऐसे लापरवाह लोग उन स्वास्थ्य कर्मियों को भी बदनाम करते हैं जो रात दिन एक करके लोगों की सेवा में जुटे हैं। वर्तमान कोरोनकाल में देश के तमाम स्वास्थ्य केंद्रों में जहां महामारी के कारण मौत से जूझ रहे लोगों की कतार लगी है वहीं अकर्मण्यता, लापरवाही व पैसों के लालच से जुड़े रूह कंपकपा देने वाले तमाम मामले भी सामने आ रहे हैं। ऐसा ही एक मामला शिवपुरी से सामने आया यदि सी सी टीवी फुटेज सामने नहीं आते तो लापरवाही की पोल भी नहीं खुलती।

जिला अस्पताल के कोविड वार्ड में दो दिन से भर्ती पिछोर के दुर्गापुर निवासी शिक्षक सुरेंद्र शर्मा की बुधवार की सुबह करीब सवा आठ बजे मौत हो गई। प्रारंभिक ताैर पर उनकी मौत की ऑक्सीजन हटाने से होना बताई जा रही है। हालांकि अस्पताल प्रबंधन ने कोरोना मरीज की मौत के इस कारण को नकारने के लिए कई तरह के तर्क दिए, लेकिन वे अपने ही तर्कों में उलझते दिखे। परिजन के हंगामा और आरोपों के बीच अस्पताल के अधीक्षक डॉ केबी वर्मा ने कहा कि मरीज की ऑक्सीजन नहीं हटाई गई। उनकी हालत खराब थी इसलिए उन्हें बचाया नहीं जा सका। इसके बाद भी परिजन नहीं माने और अस्पताल के वार्ड के सीसीटीवी फुटेज निकलवाने पर अड़ गए।

आखिरकार फुटेज निकलवाए गए तो पोर्टेबल ऑक्सीजन कंसंट्रेटर हटाते हुए वार्ड ब्वॉय साफ तौर पर दिख रहा है। इसके बाद मेडिकल कॉलेज के डीन ने तर्क दिया कि मरीज को ऑक्सीजन की जरूरत ही नहीं थी। इसलिए नर्स के कहने पर वार्ड ब्वॉय ने दूसरे मरीज के लिए ऑक्सीजन कंसंट्रेटर निकाल लिया। अस्पताल प्रबंधन के इन्हीं दो अलग-अलग तर्कों से मामला न केवल संदिग्ध हो गया है बल्कि जिम्मेदारों की मंशा पर भी सवाल खड़े हो गए। हालांकि बाद में मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ अक्षय निगम ने पूरे मामले की जांच के लिए टीम गठित करने के आदेश दिए हैं। परिजन का आरोप है कि मंगलवार की रात 11 बजे से बुधवार की सुबह तक गंभीर हालत में तड़प रहे मरीज को देखने के लिए न तो नर्स आईं और न ही डॉक्टर।

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