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झांसी दुर्ग से आई शहीद ज्योति स्थापना के साथ वीरांगना बलिदान मेला प्रारम्भ

1008 दीपों से जगमगा उठी झांसी की रानी की समाधि

कवि सम्मेलन व सम्मान समारोह 18 को

ग्वालियर / झांसी दुर्ग से आई शहीद ज्योति के लक्ष्मीबाई समाधी पर स्थापना के साथ  दो दिवसीय वीरांगन बलिदान मेला का शुभारंभ हुआ। 1008 दीप शहीदों के नाम जैसे ही जले, झांसी की रानी बलि वेदी दिवाली की तरह जगमगा उठी

18 जून को बलिदान मेला का प्रमुख समारोह होगा।

मेले में आयोजित होने वाले सम्मान समारोह में प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, संस्कृति मंत्री धर्मेंद्र लोधी एवं प्रदेश संघटन महामंत्री हितानंद शर्मा को आमंत्रित किया गया है।

आज बुंदेली युवा झांसी से शहीद ज्योति लेकर आए, जिसे राइडर्स क्लब की वाहन सवार महिलाओं की अगुआई में फूलबाग चौराहे लाया गया जहां से छः अश्वारोही झाकियों के साथ गाजे बाजे से समाधि तक शोभायात्रा के रूप में लाया गया। बलिदान मेला के संस्थापक अध्यक्ष पूर्व सांसद पूर्व मंत्री जयभान सिंह पवैया ने शहीद ज्योति रा. स्व. संघ के सुरेद्र मिश्रा, सभापति मनोज तोमर, विहिप के पप्पू वर्मा व भाजपा अध्यक्ष जयप्रकाश राजोरिया के साथ ज्योति वेदी पर स्थापित की व राष्ट्रगीत के बाद आकर्षक आतिशबाजी से आकाश जगमगा उठा।

प्रदर्शनी का शुभारंभ

बलिदान मेला प्रांगण पर मध्य प्रदेश संस्कृत विभाग व नगर निगम द्वारा लगाई गई आकर्षक प्रदर्शनियां जनता के दर्शनार्थ उद्घाटन की गईं, इस अवसर पर कलेक्टर रुचिका चौहान उपस्थित रहीं।

आज प्रमुख समारोह महानत्य व कवि सम्मेलन

18 जून की सांय 7 बजे से “खूब लड़ी मर्दानी” महानाट्य शुरू होगा जो की घोड़े, ऊंट व 200 स्थानीय पात्रों द्वारा मंचित किया जाएगा।

सम्मान समारोह में शहीद मंगल पांडे के साथी दुर्गा सिंह के वंशज, शौर्य चक्र प्राप्त शाहिद विवेक सिंह तोमर की धर्मपत्नी व नेशनल क्रिकेटर कुं, वैष्णवी शर्मा सम्मानित होंगे।

कवि सम्मेलन के लिए पद्म श्री डॉ. सुरेन्द्र दुबे (रायपुर), श्री अरुण जैमिनी (दिल्ली), श्री विनीत चौहान (अलवर), भुवन मोहीनी जी (इंदौर), श्री सुरेश अलबेला (कोटा), श्री शशिकांत यादव (देवास), श्री योगेन्द्र शर्मा (भीलवाड़ा), श्री गौरव चौहान (इटावा), श्री दिनेश “देसी घी” (शाजापुर) ग्वालियर पहुंच रहे हैं।

 

सर्वदलीय श्रद्धांजलि सभा वीरांगना लक्ष्मीबाई समाधि स्थल पर 

– वीरांगना महारानी लक्ष्मीबाई के बलिदान दिवस 18 जून 2025 पर निगम की ओर से समाधि स्थल पर सर्वदलीय श्रद्धांजलि सभा का आयोजन प्रातः 7ः30 बजे किया जाएगा।
वीरांगना के बलिदान दिवस पर नगर निगम ग्वालियर द्वारा सर्वदलीय श्रद्धांजलि सभा में उपस्थित सभी गणमान्य नागरिकों को राष्ट्रीय एकता व अखडंता की शपथ दिलाई जाएगी। शहर के सभी गणमान्य नागरिकों से आग्रह है कि अधिक से अधिक संख्या में वीरांगना की समाधि पर दिनांक 18 जून 2025 की प्रातःकाल 7ः30 बजे उपस्थित होकर वीरांगना को अपने श्रद्धासुमन अर्पित करें तथा देश की एकता व अखंडता के लिए अपनी जान न्यौछावर करने वाले बलिदानियों को याद करें।
ज्ञात हो कि वीरांगना महारानी लक्ष्मीबाई के बलिदान दिवस पर नगर निगम ग्वालियर द्वारा प्रतिवर्ष देश के युवाओं को वीरांगना की शहादत को याद रखने के लिए अनेक व्यवस्थाएं एवं आयोजन कराए जाते हैं। नगर निगम ग्वालियर द्वारा वीरांगना के समाधि स्थल की विशेष साफ सफाई के साथ ही 22 फुट उंची वीरांगना की प्रतिमा की रंगाई पुताई कराई गई है तथा समाधि स्थल को विद्युत एवं पुष्प के साथ सजाया गया है।
वीरांगना महारानी लक्ष्मीबाई के शस्त्रों की दो दिवसीय प्रदर्शनी का उद्घाटन

वीरांगना महारानी लक्ष्मीबाई की समाधि स्थल पर बलिदान दिवस पर नगर निगम ग्वालियर द्वारा आयोजित प्रदर्शनी का उदघाटन पूर्व मंत्री श्री जयभान सिंह पवैया, पूर्व सांसद श्री विवेक नारायण शेजवलकर, सभापति श्री मनोज तोमर, भाजपा जिला अध्यक्ष श्री जयप्रकाश राजोरिया, पूर्व जिला अध्यक्ष श्री अभय चौधरी, श्री कमल माखीजानी द्वारा किया गया। इस अवसर पर बडी संख्या में क्षेत्रीय नागरिकगण उपस्थित रहे।
प्रदर्शनी के शुभारंभ अवसर पर अतिथियों का स्वागत नोडल अधिकारी श्री महेंद्र अग्रवाल द्वारा किया गया। इस अवसर शहर के नागरिकों एवं समाजसेवियों, राष्ट्रभक्तों तथा निगम के अधिकारियों ने प्रदर्शनी का अवलोकन किया गया। प्रदर्शनी में वीरांगना महारानी लक्ष्मीबाई जी द्वारा 1857 में उपयोग किए जाने वाले शस्त्रों के साथ ही उनके जीवन से संबंधित झाकियां चित्र उनके द्वारा उपयोग किये जाने वाले हथियार वस्त्र इत्यादि को प्रदर्शित किया गया। जिसमें उनके जिरह बख्तर, चेस्ट प्लेट, पंजा, दस्ताना, गुर्ज, खांडा, उना, कटार, छडी, गुप्ती ,रिवाल्वर, पटे, ढाल, हेल्मेेट, उटनाली एवं तेंगे आदि प्रदर्शनी में लगाए गए। प्रर्दशनी में शहीद तात्याटोपे के झंझाल बंदूक, तोडेदार बंन्दूक, कावरिन बंन्दूक, तलवार, तमंचा, कटार, भाले छुरी एवं बछीपाल शामिल हैं। इसके साथ ही प्रदर्शनी में सुखदेव राजगुरू इत्यादि शहीदों के दुर्लभ पत्र और क्रांति दस्तावेज, तात्याटोपे के बयान के साथ-साथ अमर शहीद अमरचन्द्र बाठिया के जीवन क्रम सहित अनेक एतिहासिक फोटो व पेंटिग को प्रदर्शनी में दर्शाया गया है।

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