राजनीतिज्ञ हो तो अपने दिग्गीराजा जैसा पहले जब कांग्रेस ने ज्योतिरादित्य को मुख्यमंत्री के चेहरे के रूप में प्रस्तुत करने का मन बनाया तो दिग्गीराजा ने खोल दिया मोर्चा और बड़ी चतुराई से कमलनाथ को अध्यक्ष बनवाकर चुनावपूर्व होने वाली इस घोषणा को टलवा दिया, अभी भी दिग्गीराजा शांत नहीं बैठे हैं एक टीवी चैनल में इंटरव्यू के दौरान जब उनसे पूछा गया कि वे मुख्यमंत्री के रूप में ज्योतिरादित्य के नाम पर क्या राय रखते हैं। अपने दिग्गीराजा ने सीधे सीधे इसका समर्थन न करके अपने इरादे एकबार फिर साफ कर दिए। वे चाहते तो यह कह सकते थे कि ज्योतिरादित्य कांग्रेस के ओर से मुख्यमंत्री के रूप में एक बेहतर नाम है और में इसका समर्थन करता हूँ लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं कहा यह सिद्ध कर दिया कि व्यक्तिगत रूप से उन्हें ज्योतिरादित्य मंजूर नहीं हैं।उन्होंने बात घुमाते हुए कहा कि ज्योतिरादित्य सिंधिया ने तो पहले कोई विवाद था और न अब है। हमारे तो बहुत पुराने रिश्ते हैं। ज्योतिरादित्य सिंधिया बहुत काबिल व्यक्ति हैं। केंद्र में पहले अच्छा काम किया है लेकििन ज्योतिरादित्य सिंधिया को सीएम का चेहरा बनाये जाने पर कहा कि यह निर्णय पार्टी और राहुल गांधी को लेना है। बता दें कि इससे पहले खबर आई थी कि राहुल गांधी, ज्योतिरादित्य सिंधिया को कांग्रेस का चेहरा घोषित करना चाहते थे परंतु दिग्विजय सिंह एवं नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने इसका विरोध किया और राहुल गांधी को अपना फैसला टालना पड़ा।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने कहा कि, ‘कांग्रेस के लिए अच्छा अवसर है, बशर्ते हम लोग अपनी तैयारी पूरी तरह कर लें। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग ने फर्जी मतदाता की शिकायतों पर करीब 10 लाख वोट कम किये हैं। भाजपा की संगठन शक्ति हमसे अच्छी है और वो बोगस वोट कराने में माहिर हैं। इसलिये हमने अभी से शुरुआत कर दी है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव में बहुजन समाज पार्टी(बसपा) के साथ चुनाव पूर्व गठबंधन करने से कांग्रेस को मदद मिलेगी। इससे राज्य के कुछ क्षेत्रों में दलित मतों को हासिल करने में मदद मिलेगी।
दिग्विजय सिंह ने कहा कि, ‘अगर मध्यप्रदेश में चुनाव के परिणामों के आधार पर गठबंधन को देखें.. मुरैना क्षेत्र से ग्वालियर क्षेत्र और सागर क्षेत्र से रीवा क्षेत्र तक, उत्तर प्रदेश की सीमा से लगा क्षेत्र है, जहां बसपा को 10-30,000 वोट मिलते हैं। उन्होंने कहा, ‘अगर आप इन वोटों को देखें तो ये वोट मुख्य रूप से दलितों के हैं.. जो 1952 से कांग्रेस को वोट देते आ रहे हैं। अगर हमारे पास बसपा के साथ चुनाव पूर्व रणनीतिक गठबंधन होगा, तो इससे निश्चय ही मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि पार्टी में लीडरशिप का प्रश्न है ही नहीं। एक बार भाजपा चुनाव हार जाये, उसके बाद आगे का निर्णय लिया जाएगा।