प्रवीण दुबे
ग्वालियर 9 नवंबर 2025/ग्वालियर के बड़ागांव स्थित बिशब हाउस में धर्मातरण से जुड़ी संदिग्ध गतिविधियों को लेकर व्यक्त की जा रही आशंका प्रथम दृष्टया सही साबित होती दिखाई दे रही हैं। सूत्रों से जिस प्रकार की जानकारी सामने आ रही है उसके मुताबिक अन्य प्रदेशों से ईसाई शिक्षा दिलाने के नाम पर ग्वालियर लाए गए बच्चों में से अधिकांश के सरनेम अर्थात कुलनाम हिन्दू होना पाया गया है,यह भी सामने आया है कि बच्चों की मूल स्कूली शिक्षा को भी रोक दिया गया है और उन्हें भाषा ज्ञान दिलाने के आधार पर यहां लाया गया है। हालांकी अभी सरकारी तौर पर इसकी पुष्टि नहीं की गई है और जांच जारी है।
विदित हो कि शब्दशक्ति न्यूज़ ने बीते 5 नवंबर को धर्मान्तरण का अड्डा बना ग्वालियर… शीर्षक से खबर प्रसारित की थी,इसके साथ ही अन्य अखबार ने बड़ागांव स्थित आलीशान बिशप हाउस में देश भर से आए आदिवासी गरीब बच्चों को इसाई शिक्षा के नाम पर धर्म परिवर्तन का मामला उजागर किया था। इसके बाद पूरे प्रदेश में हड़कंप मच गया था,तमाम सनातनी संगठनों द्वारा इसको लेकर आक्रोश व्यक्त करते हुए धर्मानतरण गतिविधियों को लेकर ग्वालियर जिला प्रशासन के नाकारापन की निंदा की थी।
इतना ही नहीं ग्वालियर के प्रबुद्ध नागरिकों ने बड़ागांव स्थित बिशप निवास परिसर में हो रहे कन्वर्जन की निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर शनिवार को जिलाधीश रुचिका चौहान एवं पुलिस अधीक्षक धर्मवीर सिंह को ज्ञापन सौंपा था। उन्होंने 5 नवंबर को प्रकाशित खबर का हवाला देते हुए बिसप निवास परिसर में प्रदेश के बाहर के जन-जातीय समुदाय विशेषकर झारखंड, उड़ीसा, बिहार के नाबालिग बच्चों का कन्वर्जन कर उन्हें ईसाई बनाए जाने की बात की कड़ी निंदा की थी।
उन्होंने खेद जताते हुए कहा था कि प्रशासन द्वारा गठित जांच दल द्वारा रिपोर्ट आने के पहले ही सभी बच्चों को ईसाई समुदाय का बताया गया। उन्होंने शिकायत करते हुए मांग की- संस्थान के पंजीयन, नियमों और उसकी गतिविधियों की विस्तृत जांच की जाए, प्रबुद्ध नागरिकों का कहना था कि प्रकाशित खबर के अनुसार छद्म रूप से अस्पताल के नाम से संचालित परिसर को नाबालिग बच्चों के अस्पताल के नाम से संचालित किया जा रहा था, जो कि संस्थान की गतिविधियों पर संदेह उत्पन्न करता है। इसलिए उक्त संस्थान के समस्त अभिलेख को सील कर जांच समिति को अपने कब्जे में लेना चाहिए। बच्चों के रखने का वास्तविक उद्देश्य, माता-पिता की सहमति, जन्म प्रमाण पत्र और मूल स्थान की जांच हो, संस्था के वित्तीय लेन-देन और विदेशी फंडिंग की प्रवर्तन निदेशालय से जांच कराई जाए, क्या संस्था द्वारा लाए जाने वाले अवस्यक बालकों के संबंध में जिला प्रशासन को जानकारी दी गई या शासन द्वारा निर्धारित बाल कल्याण समिति को किसी प्रकार की सूचना अथवा कार्यवाही से अवगत कराया गया, नागरिकों ने अधिनियम 2021 एवं नियम 2015 के प्रावधानों के उल्लंघन के संबंध में जांच की जाए। साथ ही किशोर न्याय अधिनियम 2015 के अध्याय 6 के अधीन कार्यवाही की जाए। प्रबुद्ध नागरिकों ने यह भी कहा कि जांच समिति की निष्पक्षता प्रभावित न हो, इसलिए प्रशासन किसी भी निष्कर्ष पर जांच रिपोर्ट आने से पहले न पहुंचे और नई जांच समिति गठित की जाए। उन्होंने प्रशासन से दोषियों पर कठोर कार्रवाई करने, संस्था का पंजीयन निरस्त करने तथा बच्चों को किशोर न्याय अधिनियम के अंतर्गत संरक्षण में लेने की बात भी कही।
बढ़ते दबाव के चलते हरकत में आया ग्वालियर प्रशासन
बढ़ते दबाव के चलते ग्वालियर प्रशासन हरकत में आया ग्वालियर बड़ागांव स्थित बिशप हाउस में कन्वर्जन की जांच हेतु जिलाधीश द्वारा समिति का गठन किया गया वहीं दूसरी ओर वहीं अब बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) ने भी जांच शुरू कर दी है। सूत्रों के मुताबिक प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि बिशप हाउस बिना मान्यता के ही संचालित हो रहा है।अब यहां निवासरत बच्चों के संबंधित दूसरे राज्यों के जिले के जिलाधीशों से भी जानकारी मांगी जा रही है।
उधर बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) के अध्यक्ष सोमेश महंत, सदस्य मनीषा शर्मा, रश्मि त्रिपाठी, अंजू भदौरिया और संतोष शर्मा का दल भी जांच करने विशप हाउस पहुंचा। इस दल ने भी दस्तावेज लेने के साथ ही न सिर्फ बच्चों से बात की बल्कि उनके
परिजनों के नम्बर लेकर उनसे भी जानकारी ली। जिसमें फिल्हाल जाति संबंधित कोई नई बात सामने नहीं आई है, लेकिन जांच पड़ताल में यह खुलासा हुआ है कि यह प्रशिक्षण केन्द्र बिना किसी मान्यता के संचालित हो रहा है। इस संबंध में किसी भी तरह का मान्यता प्रमाण पत्र बिशप हाउस पेश नहीं कर सका है। बताया गया है कि सीडब्ल्यूसी अब शिक्षा विभाग के कुछ अधिकारियों को लेकर फिर से जांच करने पहुंचेगी। ताकि दस्तावेजों की सही से पड़ताल की जा सके, इनके द्वारा सोमवार को अपनी रिपोर्ट जिलाधीश को सौंपी जाएगी।