बिशप निवास परिसर में कन्वर्जन की हो निष्पक्ष जांच
-प्रबुद्ध नागरिकों ने जिलाधीश और पुलिस अधीक्षक से की शिकायत
ग्वालियर 8 नवंबर 2025 /बड़ागांव स्थित बिशप निवास परिसर में हो रहे कन्वर्जन की निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर शहर के प्रबुद्ध नागरिकों ने शनिवार को जिलाधीश रुचिका चौहान एवं पुलिस अधीक्षक धर्मवीर सिंह को ज्ञापन सौंपा।
प्रबुद्ध नागरिकों ने बताया कि इस संबंध में शहर के प्रमुख समाचार पत्रों में 5 नवंबर को खबर प्रकाशित कर खुलासा किया गया था कि बिसप निवास परिसर में प्रदेश के बाहर के जन-जातीय समुदाय विशेषकर झारखंड, उड़ीसा, बिहार के नाबालिग बच्चों का कन्वर्जन कर उन्हें ईसाई बनाया जा रहा है। उन्होंने खेद जताते हुए कहा प्रशासन द्वारा गठित जांच दल द्वारा रिपोर्ट आने के पहले ही सभी बच्चों को ईसाई समुदाय का बताया गया। उन्होंने शिकायत करते हुए मांग की- संस्थान के पंजीयन, नियमों और उसकी गतिविधियों की विस्तृत जांच की जाए, समाचार पत्र के अनुसार प्रकाशित खबर के अनुसार छद्म रूप से अस्पताल के नाम से संचालित परिसर को नाबालिग बच्चों के अस्पताल के नाम से संचालित किया जा रहा था, जो कि संस्थान की गतिविधियों पर संदेह उत्पन्न करता है। इसलिए उक्त संस्थान के समस्त अभिलेख को सील कर जांच समिति को अपने कब्जे में लेना चाहिए। बच्चों के रखने का वास्तविक उद्देश्य, माता-पिता की सहमति, जन्म प्रमाण पत्र और मूल स्थान की जांच हो, संस्था के वित्तीय लेन-देन और विदेशी फंडिंग की प्रवर्तन निदेशालय से जांच कराई जाए, क्या संस्था द्वारा लाए जाने वाले अवस्यक बालकों के संबंध में जिला प्रशासन को जानकारी दी गई या शासन द्वारा निर्धारित बाल कल्याण समिति को किसी प्रकार की सूचना अथवा कार्यवाही से अवगत कराया गया, नागरिकों ने अधिनियम 2021 एवं नियम 2015 के प्रावधानों के उल्लंघन के संबंध में जांच की जाए। साथ ही किशोर न्याय अधिनियम 2015 के अध्याय 6 के अधीन कार्यवाही की जाए। प्रबुद्ध नागरिकों ने यह भी कहा कि जांच समिति की निष्पक्षता प्रभावित न हो, इसलिए प्रशासन किसी भी निष्कर्ष पर जांच रिपोर्ट आने से पहले न पहुंचे और नई जांच समिति गठित की जाए। उन्होंने प्रशासन से दोषियों पर कठोर कार्रवाई करने, संस्था का पंजीयन निरस्त करने तथा बच्चों को किशोर न्याय अधिनियम के अंतर्गत संरक्षण में लेने की अपील की है। ज्ञापन देने वालों में वरिष्ठ समाजसेवी वीरेंद्र पाल, विक्रम पिप्पल सहित विभिन्न संगठनों के पदाधिकारी शामिल रहे।
धर्मान्तरण मामला : प्रबुद्ध नागरिकों की मांग संस्था के वित्तीय लेन-देन और विदेशी फंडिंग की प्रवर्तन निदेशालय से जांच कराई जाए
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