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ध्यानमग्न मुद्रा में सुरीले भजन प्रस्तुत करने वाले मशहूर गायक विनोद अग्रवाल का निधन

भजन सम्राट विनोद अग्रवाल का आज मंगलवार सुबह मथुरा में निधन हो गया है। सीने में दर्द की शिकायत के बाद उन्होंने रविवार को एक निजी अस्पताल नयति मेडिसिटी में भर्ती कराया गया था। उन्हें दो दिन से वेंटिलेटर पर रखा गया था और उनके कई अंगों ने काम करना बंद कर दिया था। आज सुबह करीब चार बजे उन्होंने अंतिम सांस ली। उनका पार्थिव शरीर उनके पुष्पांजलि बैकुंठ स्थित गोविंद की गली आवास पर लाया गया, यहां दोपहर एक बजे अंतिम दर्शन के लिए  रखा जाएगा। करीब 3 बजे वृन्दावन में उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।

दरअसल, विनोद अग्रवाल ने यहां वृन्दावन के पुष्पांजलि बैकुंठ अपार्टमेंट में अपना आवास बना रखा था। रविवार की सुबह सीने में दर्द की शिकायत पर उन्हें नयति अस्पताल में भर्ती कराया गया था।जहां उन्होंने 6 अक्टूबर (मंगलवार) को सुबह 4 बजे अंतिम सांस ली। उनके परिवार के सदस्य भी मुंबई से मथुरा पहुंच गए हैं। नयति मेडिसिटी की डायरेक्टर ने बताया कि फिलहाल वो दो दिन से वेंटिलेटर थे उनके अंग पूरी तरह से काम नहीं कर पा रहे थे। उनकी लागातार हालत नाजुक होती जा रही थी।

विनोद अग्रवाल का जन्म 6 जून 1955 को दिल्ली में हुआ था। उनके पिता स्वर्गीय किशननंद अग्रवाल और मां स्वर्गीय रत्नदेवी अग्रवाल को भगवान कृष्ण और राधा पर अटूट विश्वास था। 1962 में माता-पिता और भाई-बहनों के साथ वो दिल्ली से मुंबई चले गए। 20 साल की उम्र में विनोद अग्रवाल की शादी कुसुमलता अग्रवाल से हो गई थी। उनके दो बच्चे जतिन ओर शिखा हैं, जिनकी शादी हो चुकी है। उनका बेटा जतिन मुंबई में कपड़ों का कारोबार देखता है। विनोद अग्रवाल के माता-पिता भगवान श्रीकृष्ण और राधा के परम भक्त थे। परिवार में भक्तिमय माहौल होने की वजह से विनोद अग्रवाल ने बेहद कम उम्र में ही हार्मोनियम बजाना सीख लिया था। विनोद अग्रवाल के भजन देश में ही नहीं विदेशों में भी काफी लोकप्रिय हैं। विनोद अमेरिका, इंग्लैंड, फ्रांस, दुबई सहित यूरोप के कई शहरों में सैकड़ों लाइव शो कर चुके हैं।

 

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