राज्यसभा में एनडीए का बहुमत नहीं है। इसके साथ एनडीए के घटकदल शिरोमणि अकाली दल भी इन विधेयकों के खिलाफ है। ऐसे कांग्रेस दूसरे गैर एनडीए दलों के साथ संपर्क कर रही है। पार्टी चर्चा के दौरान इन विधेयकों को सलेक्ट कमेटी को भेजने की मांग करेगी। इसके लिए सरकार पर हरमुमकिन दबाव बना रही है।
कांग्रेस के एक राज्यसभा सदस्य ने कहा कि हमारी मांग होगी कि सरकार विधेयकों को व्यापक चर्चा के लिए सलेक्ट कमेटी को भेज दे। सरकार ऐसा नहीं करती और विधेयकों को पारित कराने की कोशिश करती है, तो विपक्ष मतविभाजन की मांग करेगा। ताकि, यह साफ हो सके कि कौन किसान और कौन भाजपा के साथ है। पार्टी नेता मानते हैं कि सत्तापक्ष बीजेडी, टीआरएस, वाईएसआर कांग्रेस और एआईडीएमके का समर्थन जुटा लेता है, तो सरकार विधेयकों को पारित कराने का आंकड़ा जुटा सकती है। पर कई सांसद कोरोना संक्रमण की वजह से संसद नहीं आ रहे हैं। ऐसे में सरकार भी विधेयकों को समिति को भेजने पर तैयार हो सकती है।
भाजपा ने भी अपने सांसदों को उपस्थित रहने को कहा
इस बीच सरकार ने कृषि संबंधी विधेयकों को राज्यसभा से पारित कराने की भी तैयारी शुरू कर दी है। यह विधेयक ररिवार को राज्यसभा में लाए जा सकते हैं। इसे देखते हुए भाजपा ने रविवार को अपने सांसदों को सदन में उपस्थित रहने को कहा है। हालांकि इस बीच विपक्ष से यह मांग भी उठने लगी है कि विधेयकों को प्रवर समिति को भेजा जाए। किसानों के विरोध को देखते हुए भाजपा के अंदर भी यह बात उठने लगी है कि आशंकाओं को समाप्त करने के लिए एमएसपी से कम पर खरीद न किए जाने को विधेयक में सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
द्रमुक ने सहयोगी दलों की बैठक बुलाई
कृषि विधेयकों के खिलाफ रणनीति तैयार करने के मद्देनजर द्रमुक ने अपने सहयोगी दलों की बैठक बुलाने की घोषणा की। यह बैठक 21 सितंबर को होगी। इस बैठक में लोकसभा में पारित हुए कृषि विधेयकों के विरोध को लेकर आगे की रणनीति एवं कदमों के बारे में चर्चा की जाएगी। द्रमुक अध्यक्ष एमके स्टालिन ने आरोप लगाया कि इन विधेयकों के कारण कॉरपोरेट द्वारा कृषि उत्पादों की जमाखोरी को बढ़ावा मिलेगा और समर्थन मूल्य पर इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।