ग्वालियर /शिकायतकर्ता द्वारा नगर पालिका निगम ग्वालियर के अधिकारियों/कर्मचारियों एवं मैसर्स दीपक एडर्वटाइजर्स के विरुद्ध फर्म को अनुचित लाभ दिया जाकर बकाया पैनेल्टी राशि एवं विज्ञापन राशि कम कर निगम को आर्थिक क्षति पहुँचाने के संबंध में शिकायत ई० ओ० डब्ल्यू इकाई ग्वालियर में प्रस्तुत की गई थी। शिकायत जांच में पाया गया कि नगर निगम ग्वालियर के 48 सार्वजनिक शौचालयों पर विज्ञापन हेतु दिनांक 10.11.2017 को निविदा आमंत्रित की गई थी फर्म दीपक एडर्वटाइजर्स को सार्वजनिक शौचालयों पर विज्ञापन करने हेतु निविदा स्वीकृत की गई थी। आयुक्त नगर निगम ग्वालियर की ओर से तत्कालीन सी.सी.ओ. प्रदीप चतुर्वेदी एवं फर्म दीपक एडर्वटाइजर्स की ओर से दीपक जेठवानी द्वारा अनुबंध किया गया था। उक्त अनुबंध पत्र की शर्त क्रमांक 1 में नगर निगम ग्वालियर के 48 प्रमुख सार्वजनिक सुलभ शौचालयों व शर्त क्रमांक 10 में टेण्डर अवधि समाप्त होने पर निविदाकार को 5 प्रतिशत राशि बढ़ाकर आगामी वर्षों के लिये टेण्डर नवीनीकरण किये जाने का उल्लेख कूटरचित है। जबकि मेयर-इन-काउंसिल के संकल्प क्रमांक 582 में उक्त शर्तों का कोई उल्लेख नहीं है।
उक्त एजेंसी द्वारा किये गये विज्ञापन की देय राशि का निर्धारण करने हेतु ग्वालियर नगर पालिक निगम द्वारा समय-समय पर समितियां गठित की गई, जिन्होंने संचालक मैसर्स दीपक जेठवानी को आर्थिक लाभ देने के उद्देश्य से नियम विरुद्ध तरीके से सिर्फ 38 सार्वजनिक शौचालयों एंव मूत्रालयों पर होर्डिंग्स पर विज्ञापन पर देय राशि का निर्धारण 48,85,272/-रूपये दिनांक 05.12.2020 एवं अन्य समिति द्वारा दिनांक 11.12.2021 को विज्ञापन की देय राशि की गणना 18,56,942/- रुपये की गई जबकि वास्तव में 36 माह की अवधि के अनुसार 48 सार्वजनिक शौचालयों के विज्ञापन देय राशि 72,57,600/- रूपये होने से शासन को 54,00,658/- रुपये की आर्थिक क्षति की गई। उक्त कृत्य को प्रथम दृष्टया आपराधिक पाते हु ये आरोपी सी०सी० ओ० प्रदीप चतुर्वेदी की मृत्यु हो जाने से शेष अन्य के विरुद्ध सहायक नोडल अधिकारी शशिकांत शुक्ला, सहायक लिपिक मदन पालिया आउटसोर्स कर्मचारी धर्मेन्द्र शर्मा अपर आयुक्त राजेश श्रीवास्तव, अपर आयुक्त वित्त श्री देवेन्द्र पालिया, अधीक्षण यंत्री जे०पी० पारा, उपायुक्त विज्ञापन सुनील सिंह चौहान एवं फर्म दीपक एडवैटाइजर्स के संचालक दीपक जेठवानी व अन्य के विरूद्ध धारा 420,409,467,468,120 बी भा.द.वि. एवं धारा 7 (ए), 13(1) क सहपठित धारा 13(2) भ्र.नि.अ. 1988 संशोधित अधिनियम 2018 का अपराध ईओडब्ल्यू द्वारा पंजीबद्ध किया गया है।
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