हनुमान जन्मोत्सव 16 अप्रैल 2022, शनिवार को धूमधाम से मनाया जाएगा। ग्वालियर चम्बल अंचल की बात करें तो यहां के तमाम शहरों से लेकर ग्रामीण अंचल के हर छोटे बड़े मंदिर में हनुमानजी जन्मोत्सव के उपलक्ष्य में मंदिरों में सुंदरकांड सहित विशेष पूजा की तैयारी की गई है। पूरे अंचल में भंडारों की धूम रहने वाली है। अंचल के प्रसिद्ध धुंआ के हनुमानजी पर मेले जैसी धूम है इसी प्रकार ददरउआ धाम के डॉक्टर हनुमानजी, जौरासी हनुमानजी, खेड़ापति हनुमानजी, मंशापूर्ण हनुमानजी गरगजके हनुमानजी आदि मंदिरों पर भंडारे के साथ आकर्षक सजावट की गई है। यहां भोर के साथ ही भक्तों की भीड़ लगने वाली है,इसको लेकर पुलिस प्रशासन ने भी विशेष दिशानिर्देशों के साथ मोर्चा संभाला हुआ है।
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, हनुमान जन्मोत्सव के दिन व्रत रखने वाले भक्तों को पूर्व रात्रि ब्रह्मचर्य का पालन करें। जमीन पर ही सोना उत्तम माना गया है। हनुमान जन्मोत्सव के दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में जागना चाहिए। इस दिन प्रभु श्रीराम, माता सीता एवं श्री हनुमान का स्मरण करें। स्नान के बाद बजरंग बली की प्रतिमा की प्रतिष्ठा कर विधिपूर्वक पूजा कर आरती उतारें।
हनुमान जन्मोत्सव पर बजरंगबली को ऐसे करें प्रसन्न-
शास्त्रों के अनुसार, हनुमान चालीसा और बजरंग बाण का पाठ करने से अंजनी पुत्र प्रसन्न होते हैं। हनुमान जी को प्रसाद के रुप में गुड़, भीगे या भुने हुए चने, बेसन के लड्डू रख सकते हैं। पूजा सामग्री के लिए गेंदा, गुलाब, कनेर, सूरजमुखी आदि के लाल या पीले फूलर्, सिंदूर, केसरयुक्त चंदन, धूप-अगरबती, शुद्ध घी का दीप आदि ले सकते हैं।
हनुमान जन्मोत्सव पर राशिनुसार लगाएं भोग-
मेष- बेसन के लड्डू का भोग लगाएं।
वृष- तुलसी के बीज चढ़ाएं।
मिथुन- तुलसी दल अर्पित करें।
कर्क- हनुमानजी के मंदिर में पूजा करें।
सिंह- जलेबी का भोग लगाएं।
कन्या- बाबा की प्रतिमा पर चांदी का अर्क लगाएं।
तुला- मोतीचूर के लड्डू का भोग लगाएं।
वृश्चिक- काशी तुलसी दल का भोग लगाएं।
धनु- मोतीचूर के लड्डू के साथ तुलसी दल चढ़ाए।
मकर- मोतीचूर के लड्डू का भोग लगाएं।
कुंभ- सिंदूर का लेप लगाना चाहिए।
मीन- लौंग चढ़ाने से बाबा प्रसन्न होंगे।
हनुमान जयंती पर बनने वाला शुभ योग
16 अप्रैल को सुबह 05 बजकर 34 मिनट से हर्षण योग शुरू होगा, जो कि 17 अप्रैल 2022 को देर रात 02 बजकर 45 मिनट पर समाप्त होगा
जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है कि हर्ष का अर्थ खुशी व प्रसन्नता होती है। ज्योतिष के अनुसार, इस योग में किए गए कार्य खुशी प्रदान करते हैं। हालांकि इस योग में पितरों को मानने वाले कर्म नहीं करने चाहिए।
कितने बजे से शुरू होगी चैत्र पूर्णिमा 2022-
हिंदू पंचांग के अनुसार, पूर्णिमा तिथि 16 अप्रैल 2022, शनिवार को देर रात 02 बजकर 26 मिनट से शुरू होगी,जो कि 17 अप्रैल 2022, रविवार को सुबह 12 बजकर 24 मिनट पर समाप्त होगी।
इस विधि से करें हनुमान जी की पूजा-
- व्रत की पूर्व रात्रि को जमीन पर सोने से पहले भगवान राम और माता सीता के साथ-साथ हनुमान जी का स्मरण करें।
- प्रात: जल्दी उठकर दोबारा राम-सीता एवं हनुमान जी को याद करें।
- जल्दी सबेरे स्नान ध्यान करें।
- अब हाथ में गंगाजल लेकर व्रत का संकल्प करें।
- इसके बाद, पूर्व की ओर भगवान हनुमानजी की प्रतिमा को स्थापित करें।
- अब विनम्र भाव से बजरंगबली की प्रार्थना करें।
- विधि विधान से श्री हनुमानजी की आराधना करें।
हनुमान जन्मोत्सव पर बनने वाले शुभ मुहूर्त-
ब्रह्म मुहूर्त- 04:26 ए एम से 05:10 ए एम।
अभिजित मुहूर्त- 11:55 ए एम से 12:47 पी एम।
विजय मुहूर्त- 02:30 पी एम से 03:21 पी एम।
गोधूलि मुहूर्त- 06:34 पी एम से 06:58 पी एम।
अमृत काल- 01:15 ए एम, अप्रैल 17 से 02:45 ए एम, अप्रैल 17।
रवि योग- 05:55 ए एम से 08:40 ए एम।
हनुमान जी के मंत्र-
श्री हनुमंते नम:
हनुमान जी का मूल मंत्र:- ओम ह्रां ह्रीं ह्रं ह्रैं ह्रौं ह्रः॥ हं हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट्।
हनुमान जयंती से जुड़ी पौराणिक कथा-
पौराणिक कथाओं के अनुसार, अंजना एक अप्सरा थीं, हालांकि उन्होंने श्राप के कारण पृथ्वी पर जन्म लिया और यह श्राप उनपर तभी हट सकता था जब वे एक संतान को जन्म देतीं। वाल्मीकि रामायण के अनुसार केसरी श्री हनुमान जी के पिता थे। वे सुमेरू के राजा थे और केसरी बृहस्पति के पुत्र थे। अंजना ने संतान प्राप्ति के लिए 12 वर्षों की भगवान शिव की घोर तपस्या की और परिणाम स्वरूप उन्होंने संतान के रूप में हनुमानजी को प्राप्त किया। ऐसा विश्वास है कि हनुमानजी भगवान शिव के ही अवतार हैं।