Homeदेशप्रधानमंत्री मोदी पर जमकर बरसे राहुल गांधी

प्रधानमंत्री मोदी पर जमकर बरसे राहुल गांधी

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने गुजरात के बिलकिस बानो मामले में बलात्कार एवं हत्या के 11 दोषियों की रिहाई को लेकर बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा और आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री की कथनी और करनी में अंतर पूरा देश देख रहा है. कांग्रेस नेता ने इस मामले को लेकर प्रधानमंत्री को उस वक्त निशाने पर लिया, जब गत सोमवार को स्वतंत्रता दिवस के मौके पर उन्होंने लाल किले की प्राचीर से राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में कहा था कि भारत की तरक्की के लिए महिलाओं का सम्मान एक महत्वपूर्ण स्तंभ है. उन्होंने नारी शक्ति का समर्थन करने की आवश्यकता पर जोर दिया था.

राहुल गांधी ने ट्वीट किया कि 5 महीने की गर्भवती महिला से बलात्कार और उनकी 3 साल की बच्ची की हत्या करने वालों को ‘आजादी के अमृत महोत्सव’ के दौरान रिहा कर दिया गया. उन्होंने प्रधानमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा कि नारी शक्ति की झूठी बातें करने वाले लोग देश की महिलाओं को क्या संदेश दे रहे हैं? प्रधानमंत्री जी, पूरा देश आपकी कथनी और करनी में अंतर देख रहा है.

बिलकिस बानो मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे 11 दोषियों को सोमवार को गोधरा उप-कारागार से रिहा कर दिया गया था. गुजरात सरकार ने अपनी माफी नीति के तहत इन लोगों की रिहाई की मंजूरी दी थी. मुंबई में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की एक विशेष अदालत ने 11 दोषियों को बिलकिस बानो के साथ सामूहिक बलात्कार और उनके परिवार के सात सदस्यों की हत्या करने के जुर्म में 21 जनवरी 2008 को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी. बाद में बंबई उच्च न्यायालय ने उनकी दोषसिद्धि को बरकरार रखा था.

राज्य की माफी नीति के तहत बाहर आए दोषी

इस साल जून में केंद्र सरकार ने आजादी का अमृत महोत्सव के जश्न के मद्देनजर कैदियों की रिहाई से संबंधित विशेष दिशा निर्देश राज्यों को जारी कियेथे. इसमें बलात्कार के दोषियों के लिये समय पूर्व रिहाई की व्यवस्था नहीं थी. हालांकि, गुजरात के गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव राजकुमार के अनुसार, उच्चतम न्यायालय ने सरकार से कहा था कि वह राज्य की माफी नीति के तहत इन 11 दोषियों की समय पूर्व रिहाई पर विचार करे, जो उस वक्त प्रभावी था, जब निचली अदालत ने ममाले में उन्हें दोषी ठहराया था . इन 11 लोगों को मुंबई की एक विशेष अदालत ने 2008 में दोषी करार दिया था. इन लोगों को दोषी करार दिये जाने के दौरान, गुजरात में माफी नीति की व्यवस्था लागू थी, जो 1992 में प्रभाव में आयी थी. जब मामला उच्चतम न्यायालय में पहुंचा, तो शीर्ष अदालत ने हमें 1992 की नीति के तहत उनकी रिहाई के बारे में निर्णय लेने का निर्देश दिया, क्योंकि 2008 में जब उन्हें दोषी करार दिया गया था तब राज्य में यह प्रचलित था.

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