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बड़ी बेशर्मी : आखिर बांग्लादेशी घुसपेठियों को लेकर कब जागेगी ग्वालियर पुलिस ? चकमा देकर 12 घुसपैठिए हो गए गायब

 

प्रवीण दुबे

ग्वालियर /बांग्लादेशी घुसपैठियों जैसे राष्ट्रीय सुरक्षा वाले संवेदनशील विषय पर ग्वालियर पुलिस के नाकारापन की जितनी निंदा की जाए कम है। पहले से ही महाराजपुरा एयरबेस जैसे संवेदनशील क्षेत्र के पास  बिना वैध दस्तावेजों के बारह वर्षों तक  आठ बांग्लादेशी नागरिकों का रहना और ग्वालियर पुलिस को इसकी जानकारी न होने के विषय पर बदनामी झेल रही ग्वालियर पुलिस अब पुरानी छावनी इलाके से भाग गए एक दर्जन बांग्लादेशी घुसपैठियों के भाग जाने को लेकर शर्मसार हुई है। सबसे बड़ा सवाल कि जो लोग भाग खड़े हुए हैं  वह पिछले दो माह से पुलिस सर्विलांस में थे फिर वे अचानक लापता कैसे हो गए उनपर पुलिस ने लगातार नजर क्यों नहीं रखी ?

अभी भी शहर के अनेक स्थानों पर तमाम संदिग्ध और अनजान लोगों के रहने,आने जाने तथा काम करने की जानकारियां आती रहती हैं, जिन स्थानों से यह बात सामने आतीं हैं वहां के स्थानीय लोग संदिग्ध व्यक्तियों पर संदेह व्यक्त करते तो हैं लेकिन पुलिस प्रशासन को इसकी जानकारी देने से इस कारण बचते हैं क्यों कि वे किसी भी कानूनी या पुलिस पूछताछ के पचड़े में नहीं पड़ना चाहते हैं।

ऐसे लोगों का मानना है कि पुलिस खुद से तो कुछ करेगी नहीं उल्टा उनको ही रोजाना की पूछताछ में उलझा देगी। सूत्रों का कहना है कि शहर के तमाम स्थानों खासकर गोले का मंदिर, मेला ग्राउंड,गेंडे वाली सड़क,शंकरपुर,आनंद नगर,पुरानी छावनी,कटोराताल के आसपास नहर वाली माता रोड सहित शहर के आसपास सटे ग्रामीण इलाकों में घुसपैठियों के हावभाव वाले संदिग्ध लोग देखे जाते रहे हैं। इनका रहन सहन कद काठी चेहरा इस बात का साफ संकेत देता है कि ये ग्वालियर के नहीं हैं।

ऐसे ही तमाम लोग शहर के कई व्यापारी क्षेत्रों में काम करते भी देखे जा सकते हैं जैसे कि सोने चांदी के ज़ेवर,लकड़ी आदि का काम।

आश्चर्य का विषय है कि ग्वालियर पुलिस कभी भी ऐसे संदिग्ध व्यक्तियों की जांच पूछताछ करती दिखाई नहीं देती यदि वह सचेत होती तो महाराजपुरा एयरबेस जैसे संवेदनशील क्षेत्र के पास  बिना वैध दस्तावेजों के बारह वर्षों तक  आठ बांग्लादेशी नागरिक आराम से नहीं रह रहे होते वो तो भला हो हरियाणा पुलिस का कि उसने इनकी जानकारी ग्वालियर पुलिस को दे दी नहीं तो कुछ भी पता नहीं चल पाता और अब जांच के दायरे में चल रहे पुरानी छावनी के 12 घुसपेठियो का भाग जाना ग्वालियर पुलिस के मुंह पर बड़ा तमाचा है।

बांग्लादेशी नागरिकों का मामला एक पुलिस कार्रवाई भर नहीं है; यह भारत की आंतरिक सुरक्षा, जनसंख्या संतुलन और प्रशासनिक चौकसी पर गंभीर प्रश्नचिह्न है। महाराजपुरा एयरबेस जैसे संवेदनशील क्षेत्र के पास बिना वैध दस्तावेजों के बारह वर्षों तक आठ बांग्लादेशी नागरिकों का रहना इस ओर संकेत करता है कि अवैध विदेशी घुसपैठ सीमावर्ती इलाकों तक सीमित नहीं रही, अब यह देश के भीतर गहराई तक फैल चुकी है।

सबसे गंभीर प्रश्न यह है कि इतने वर्षों तक किसी एजेंसी को इसकी भनक क्यों नहीं लगी? स्थानीय लोगों का कहना है कि ये परिवार मजदूरी करते थे, किराए पर रहते थे और किसी को शक नहीं हुआ। यह दर्शाता है कि किरायेदारी सत्यापन प्रणाली और स्थानीय पुलिस निगरानी व्यवस्था कमजोर है। देश के अधिकांश शहरों में हजारों लोग बिना किसी दस्तावेज या पहचान पत्र जांच के किराए पर रह रहे हैं। यह स्थिति ग्वालियर तक सीमित नहीं है, आज ये एक राष्ट्रीय समस्या बन चुकी है।

वस्‍तुत: देखा जाए तो यह मामला कानून तोड़ने तक सीमित नहीं है; यह राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा हुआ है। एयरबेस जैसे सामरिक महत्व के क्षेत्र में विदेशी नागरिकों का रहना किसी भी दृष्टि से स्वीकार्य नहीं कहा जा सकता। पुलिस को इनके मोबाइल फोन से कई संदिग्ध संपर्क मिले हैं, जिनकी जांच एटीएस और आईबी जैसी एजेंसियां कर रही हैं। यह आशंका निराधार नहीं कि ऐसे लोग स्थानीय सूचनाएं जुटाकर विदेशी नेटवर्क तक पहुंचाने का कार्य कर रहे हों।

सबसे गंभीर प्रश्न यह है कि इतने वर्षों तक किसी एजेंसी को इसकी भनक क्यों नहीं लगी? स्थानीय लोगों का कहना है कि ये परिवार मजदूरी करते थे, किराए पर रहते थे और किसी को शक नहीं हुआ। यह दर्शाता है कि किरायेदारी सत्यापन प्रणाली और स्थानीय पुलिस निगरानी व्यवस्था कमजोर है।

शब्दशक्ति न्यूज़  से बोलीं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्रीमती विदिता डाबर संदिग्ध व्यक्तियों पर संदेह या शिकायत पर जांच करते हैं पूरे शहर में अभियान चलाना मुश्किल है

ग्वालियर में बांग्लादेशी घुसपैठियों के पकड़े जाने से जुड़े मामले को लेकर शब्दशक्ति न्यूज़ ने ग्वालियर की अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्रीमती विदिता डागर से बातचीत की और यह सवाल किया कि पुरानी छावनी से 12 संदिग्ध बांग्लादेशी घुसपैठियों के लापता होने के बाद जांच कहां तक पहुंची है? इसके जवाब में श्रीमती डाबर का कहना था कि पूर्व में महाराजपूरा से पकड़े गए संदिग्ध घुसपेठियों के आधार पर गायब हुए 12 लोगों की जांच में हम जुटे हैं उन्होंने कहा कि यह गायब हुए लोग भी पुराना मामला है। जब उनसे सवाल किया गया कि जब पुलिस को पहले से इसकी जानकारी थी तो इनपर नजर क्यों नहीं रखी गई? इसका जवाब न देते हुए श्रीमती डागर ने कहा जांच चल रही है। पूरे शहर में संदिग्ध व्यक्तियों की जांच के सवाल पर उन्होंने कहा एक एक व्यक्ति से पूछताछ कठिन है जिसपर संदेह है या शिकायत मिलती है तो जांच की जाती है।

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