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बनारस हिन्दू विश्‍वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने किया दावा कोरोना को ठीक कर सकता है गंगाजल ‘डेल्टा प्लस’ वैरियंट पर भी कारगर

बनारस हिन्दू विश्‍वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने किया दावा

बनारस हिन्दू विश्‍वविद्यालय के चिकित्सकों का दावा है कि गंगाजल न केवल कोरोना को ठीक कर सकता है, वरन ‘डेल्टा प्लस’ वैरियंट पर भी काम करेगा। विश्‍वविद्यालय के इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस (आईएमएस) में हुए शोध से पता चला है कि गंगाजल से कोरोना का इलाज हो सकता है। उनके अनुसार गंगाजल में ‘बैक्टीरियोफेज (जीवाणुभोजी)’

नामक एक औषधीय तत्व पाया जाता है जो कोरोना जैसे संक्रामक रोगों को ठीक करने की क्षमता रखता है। विश्‍वविद्यालय के वरिष्ठ न्यूरोलॉजिस्ट प्रोफेसर वीएन मिश्र और उनकी टीम कोरोना पर ‘वायरोफेज’ नाम से शोध कर रही है। उन्होंने मात्र 20 रुपये की लागत से गंगाजल का नाक में छिड़कने वाला स्प्रे तैयार किया है। शोध के दौरान वैज्ञानिकों ने लगभग तीन सौ कोरोना पीड़ितों पर इस ‘नोजल स्प्रे’ का परीक्षण किया, जिसके बहुत सकारात्मक परिणाम आए हैं। इस स्प्रे का उपयोग प्रतिदिन चार-बार करने से कोरोना ठीक हो जाता है।

टीम का दावा है कि गंगा किनारे रहने वाले लेकिन गंगा में स्नान करने वाले 90 प्रतिशत लोग कोरोना से बचे हुए हैं।

गंगा किनारे रहने वाले 491 लोगों पर सर्वे किया गया था। सर्वे में स्पष्ट हुआ कि 274 लोग जो प्रतिदिन गंगा में नहाते हैं और गंगाजल पीते हैं, उनको कोरोना नहीं हुआ था।

आईसीएमआर ने नहीं किया सहयोग

विश्‍वविद्यालय के चिकित्सकों का यह शोध कार्य आगे नहीं बढ़ सका। एक तो संसाधनों की कमी थी, सरकार को या कहें कि आईसीएमआर (भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद्) को संसाधन उपलब्ध कराने थे, परन्तु इसके उलट आईसीएमआर ने उनके दावे को रद्द कर दिया। आईसीएमआर की ओर से कहा गया कि ऐसी कोई भी क्लीनिकल स्टडी नहीं हुई है जिसके आधार पर यह कहा जा सके कि गंगाजल से कोरोना का इलाज किया जा सकता है। आईसीएमआर की ‘एथिकल कमेटी’ ने शोध को आगे बढ़ाने से रोक दिया।

उच्च न्यायालय ने मांगा जवाब

शोधकर्ताओं को इलाहाबाद उच्च न्यायालय में अपना शोधकार्य आगे बढ़ाने के लिए गुहार लगानी पड़ी है। उच्च न्यायालय ने आईसीएमआर और एथिकल कमेटी को नोटिस जारी कर 6 सप्ताह में जवाब मांगा है। इससे बीएचयू के चिकित्सक उत्साहित हैं। शोधकर्ता टीम की ओर से हाईकोर्ट में वरिष्ठ अधिवक्ता अरुण गुप्ता ने इस संबंध में एक जनहित याचिका प्रस्तुत की थी।

राष्ट्रपति व प्रधानमंत्री से अपील

गंगा मामलों के विशेषज्ञ अरुण गुप्ता ने राष्ट्रपति व प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर गंगाजल के औषधीय गुण और बैक्टीरियोफेज पर अध्ययन करवाने की अपील की है। उनका मानना है कि गंगाजल पर और भी शोध करने की आवश्यकता है।

पाथेय कण से साभार

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