भोपाल /मध्यप्रदेश में भाजपा द्वारा आज भी समाचार लिखे जाने तक जिला अध्यक्ष की सूची जारी नहीं की जा सकी है खबर है कि सूची फाईनल होने के बावजूद पार्टी के कर्ता धर्ता यह तय नहीं कर पा रहे हैं कि सूची को किस प्रकार जारी किया जाए उन्हें भय है कि यदि एक साथ सभी जिलों की सूची जारी करने पर आक्रोश फूटा तो स्थिति को नियंत्रण कैसे किया जाएगा।
इस प्रकार की भी खबरें हैं कि जिला स्तर पर जिन्हे नाम घोषित करने की जिम्मेदारी दी गई उनमें से कई जिला पर्यवेक्षक बवाल के भय से ऐसा करने को राजी नहीं हैं अतः पार्टी आलाकमान को सूची जारी करने के निर्णय पर पुनर्विचार करना पड़ रहा है जिससे देरी हो रही है।
उधर सूची जारी होने में देरी को लेकर कोई भी नेता कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है ऊपर जो कुछ बताया गया है वह पार्टी सूत्रों के आधार पर लिखा गया है लेकिन इतना अवश्य है कि पार्टी की इस घटनाक्रम को लेकर खासी किरकिरी हो रही है।
सबसे बड़ी बात तो यह है कि इस वजह से पार्टी ने चुनाव के लिए जो समय तय किया था उसमें वह पिछड़ गई है।

उल्लेखनीय है कि तय समय सीमा के मुताबिक 31 दिसंबर तक रायशुमारी के बाद सभी जिलाध्यक्ष घोषित किए जाने थे लेकिन लगातार जारी खींचतान के चलते पार्टी ऐसा नहीं कर सकी है और इसमें पिछड़ गई है।
सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री की इच्छा थी कि कम से कम ऐसे 50 प्रतिशत जिलों के अध्यक्ष घोषित कर दिए जाएं जहां ज्यादा घमासान नहीं है जिससे कि प्रदेश अध्यक्ष की चुनाव प्रक्रिया शुरू हो सके लेकिन इस मामले में प्रदेश अध्यक्ष की भिन्न राय के कारण यह सम्भव नहीं हो सका और अब स्थिति बिगड़ने से चुनाव की तय समय सीमा कहीं पीछे छूट चुकी है।