भोपाल. दलित संगठनों के भारत बंद के दौरान प्रदेश में हुई हिंसा के लिए फंडिंग की गई थी। मामले में अब तओक हुई छानबीन के बाद शनिवार को इंटेलीजेंस आईजी मकरंद देउस्कर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि ग्वालियर, बालाघाट, मुरैना, भिंड, सागर आदि जिलों में उपद्रवियों के लिए फंडिंग की गई थी। राजनीतिक संगठन और कारोबारियों की तरफ से हुई फंडिंग के बाद ही उपद्रवी हिंसा पर उतरे।
सबकुछ योजना के तहत
यह सब योजना के तहत हुआ था। जबकि कई स्थानों पर अफसरों के उकसाने पर उपद्रवियों ने हिंसा की थी। पुख्ता सबूतों के साथ फंडिंग करने वालों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। हालांकि देउस्कर ने किसी के नाम का अब तक खुलासा नहीं किया है। उन्होंने बताया कि वाट्सएप पर हिंसा भड़काने या समर्थन करने वाले मैसेज करने वालों की पहचान की गई है। जिसमें ग्वालियर में आईटी एक्ट के तहत चार एफआईआर दर्ज की गई हैं।
आईजी देउस्कर ने बताया कि चंबल और ग्वालियर संभाग में कलेक्टर द्वारा शस्त्र लाइसेंस सस्पेंड किए हैं। जिसमें ग्वालियर में 2900, भिंड में 4000 और मुरैना में 1900 शस्त्र थानों में जमा हो चुके हैं। अभी आधे की शस्त्र जमा हुए हैं। शेष हथियार जमा होना शेष है।