Homeप्रमुख खबरेंयह जनता का नहीं पुलिस प्रशासन की हठधर्मिता से बन्द था

यह जनता का नहीं पुलिस प्रशासन की हठधर्मिता से बन्द था

पुलिस प्रशासन ने डंडे के बल पर निर्मित किया भय का वातावरण
सब्जी बेचने वालों,मजदूरी करने वालों तक को नहीं जाने दिया काम पर
इंटरनेट स्कूल कॉलेज सवारी वाहन सब बन्द कराए जाने से जनता रही परेशान   भय के कारण दिनभर बाजारों में पसरा रहा सन्नाटा, नहीं खुली दुकानें
प्रवीण दुबे
दृश्य क्रमांक….1

समय सुबह 5.30 बजे

स्थान ……अम्मा महाराज की छतरी
प्रातः सैर पर निकले लोग इस कारण परेशान क्यों कि रोजाना अल सुबह खुलने वाले इस देवस्थान ट्रस्ट के दरवाजे पुलिस ने नहीं खुलने दिए।
दृश्य क्रमांक…2
समय सुबह…7  बजे
स्थान…….    जयेंद्र गंज घोड़ा चौक
रोजाना की तरह सब्जी का ठेला सजाने निकले रामप्रसाद और उनकी वृद्ध मां को पुलिस वाले की लताड़भरी धमकी चलो हटो यहां से पता नहीं आज भारत बंद है।
दृश्य क्रमांक …3
समय सुबह …9 बजे
स्थान।     ….. महाराज बाड़ा
चार पैसों के काम की जुगाड़ में गरीब मजदूरों के रोजाना एकत्रित होने  की सबसे प्रमुख जगह , भोगीराम हलकू और रतनलाल अभी आकर खड़े ही हुए थे कि सायरन बजाती पुलिस की गाड़ी से उतरे खाकी वर्दी वाले दरोगाजी की कड़क आवाज आज कोई नहीं खड़ा होगा यहां भारत बंद है।
एक दिन पहले ही ग्वालियर अंचल की इंटरनेट सेवाएं बन्द, ब्च्चों के स्कूल बंद , कॉलेज बन्द कोचिंग बन्द शहर में लोगों को उनके ठिकाने तक पहुंचाने वाले सवारी वाहनों के लिए बन्द के मद्देनजर सख्त दिशानिर्देश भय इतना की वह भी बन्द , और न जाने क्या क्या बन्द ।
यह नजारा था 10 अप्रैल के भारत बंद को लेकर ग्वालियर के पुलिस प्रशासन के रवैये का, यूं तो बन्द को लेकर कोई संगठन खुलकर सामने नहीं आया लेकिन 2 अप्रैल के बन्द के दौरान पूरी तरह से फिसड्डी साबित होने वाले पुलिस प्रशासन ने 10 अप्रैल को ऐसी खिसियाट निकाली की खुद ही पूरा ग्वालियर अंचल बन्द करा डाला।
उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व देश के सर्वोच्च न्यायालय द्वारा SC ST एक्ट में किये संशोधन के विरोध में 2 अप्रैल को बुलाए गए भारत बंद को लेकर ग्वालियर अंचल  के विभिन्न जिलों के पुलिस प्रशासन ने बेहद नाकारापन का परिचय दिया था परिणाम स्वरूप तमाम दलित संगठनों के लोगों ने जमकर हिंसाचार किया था जिसमें  ग्वालियर भिण्ड मुरैना डबरा आदि में 10 से ज्यादा लोगों की जान गई थी और करोड़ों की चल अचल संपत्ति को नुकसान पहुंचा था।
इसके बाद हिंसाचार ओर पुलिस प्रशासन की नाकामी को लेकर सोशल मीडिया पर लोगों का गुस्सा फूट पड़ा था, ऐसी दौरान सोशल मीडिया पर ही इस हिंसाचार के विरोध में 10अप्रैल के भारत बंद की बात प्रचारित हो शुरू हुई।
इस भारत बंद की अगुवाई मैं कोई व्यक्ति न कोई संगठन सामने आया बावजूद इसके 2 अप्रैल के बन्द की हिंसा  को रोकने मैं  असफल पुलिस प्रशासन 10 अप्रैल के बन्द को लेकर इतना घबरा गया  कि उसके  उसके उतावलेपन और उलजुलूल हरकतों से गवालियर अंचल की जनता भयग्रस्त हो गई।
पुलिस प्रशासन की नासमझी का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि उसने 2 अप्रैल की शाम से ही इंटरनेट सेवायें बन्द करा दीं, कई थाना क्षेत्रों में कर्फ्यू लगाकर तथा पूरे अंचल में धारा 144 लागू करके सनसनी पैदा कर दी। जब मीडिया व सामान्य जनों ने इसकी पुरजोर निंदा की तो इंटरनेट सेवाएं भाल कर दी गईं लेकिन कर्फ्यू और धारा 144 लागू रखी गयीं।
गृह मंत्रालय को जब ग्वालियर अंचल के तमाम जिलों के पुलिस प्रशासन की नाकामी की जानकारी प्राप्त हुई तो उसकी लताड़ के कारण हिंसाचार के चार दिन बाद प्रदेश के डीजीपी शुक्ला ओर  प्रमुख सचिव बसंत प्रताप सिंह को ग्वालियर अंचल के हिंसाग्रस्त इलाकों में स्थिति का जायजा लेने की याद आई। वो तो खानापूर्ति कर चले गए लेकिन 10 अप्रैल के बन्द को लेकर यह सख्त निर्देश भी दे गए कि अब किसी भी कीमत पर पुलिस प्रशासन की नककटी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
बस इसी के बाद से अंचल के विभिन्न जिलों खासकर ग्वालियर भिण्ड मुरैना के पुलिस प्रशासन ने 10 अप्रैल के बन्द को लेकर ऐसी सक्रीयता दिखाई की सोशल मीडिया से शुरु इस अफवाह को जिसमें न कोई संगठन सामने ओथा न कोई व्यक्ति सच में बदल डाला। धड़ाधड़ बैठकें, सुबह शाम प्रेस कॉन्फ्रेंस, स्कूल कॉलेज बन्द, इंटरनेट बन्द, धारा 144 , स्थिति सामान्य होने के बावजूद कर्फ्यू  आदि ने 10 अप्रैल आते आते ऐसा डरावना वातावरण बना दिया कि लोग न चाहते हुए भी बन्द को मजबूर हो गए, रही सही कसर 10 अप्रैल की पूर्व संध्या और आज सुबह से पुलिस के रौद्र रूप ने पूरी कर दी। इस प्रकार जनता नहीं प्रशासन का बन्द सफल हो गया।
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