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मधुमक्खी पालन से शहद क्रांति की ओर बढ़ता भारत

संस्तुतियों से मधुमक्खी पालन क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव आयेगा-नरेन्द्र सिंह तोम

गांधी नगर / केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री नरेंद्र सिंह तोमर ने आज गांधी नगर में आयोजित एक समारोह में मधुमक्खी पालन विकास समिति (बीडीसी) की रिपोर्ट जारी करते हुए कहा कि मधुमक्खी पालन को प्रोत्साहन देने व मधुमक्खी पालकों और इससे जुड़े उद्योगों की बेहतरी से सम्बन्धित सिफारिशों का उल्लेख किया गया है।

उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार खेती-किसानी के सभी वर्गों को लाभ पहुंचाने के लिए तेजी से कदम बढ़ा रही है। इसी क्रम में मधुमक्खी पालन से जुड़े लोगों का भी ध्यान रखा जा रहा है। BDC की रिपोर्ट में दी गई संस्तुतियों के लागू होने से मधुमक्खी पालन के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव आएगा तथा केंद्र सरकार के “मीठी/ शहद क्रांति” के लक्ष्य को प्राप्त करने में यह मददगार होगी।

श्री तोमर ने कहा कि कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय सभी संबंधित मंत्रालयों एवं विभागों आदि के साथ समन्वय एवं सलाह करते हुए रिपोर्ट में दी गई संस्तुतियों को शीघ्र लागू करने का प्रयास करेगा। श्री तोमर ने बताया कि सिफारिशों को लागू करने में वित्त मंत्रालय, MSME मंत्रालय, सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय, पर्यावरण एवं वन मंत्रालय, कानून और न्याय मंत्रालय, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, युवा मामले और खेल मंत्रालय, रक्षा मंत्रालय, नागरिक उड्डयन मंत्रालय, आयुष मंत्रालय, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय, सूचना और प्रसारण मंत्रालय, रेल मंत्रालय, वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय तथा सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय का सहयोग आवश्यक है। उन्होंने आशा व्यक्त करते हुए कहा कि यथाशीघ्र इन मंत्रालयों द्वारा इस दिशा में कार्य किया जाएगा.

उन्होंने कहा कि शहद उत्पादन वर्ष 2013-14 में 76,150 मीट्रिक टन से बढ़कर वर्ष 2018-19 में 1,20,000 मीट्रिक टन हो गया यानी 57.58% की वृद्धि हुई है। वहीं, शहद के निर्यात में बीते पांच साल में 116.13% की वृद्धि हुई है, यानी वर्ष 2013-14 में 28,378.42 मीट्रिक टन से बढ़कर वर्ष 2018-19 में 61,333.90 मीट्रिक टन बढ़ गया है। “राष्ट्रीय मधुमक्खीपालन और हनी मिशन” के अंतर्गत 3 मिनी मिशन होंगे। मुख्य जोर क्षमता निर्माण व प्रशिक्षण, मधुमक्खीपालन द्वारा महिलाओं का  सशक्तिकरण, मधुमक्खी की कालोनियों व बक्सों, यंत्र आदि का अनुदान पर वितरण का है। साथ ही मूलभूत सुविधाएं जैसे एकीकृत मधुमक्खीपालन विकास केंद्रों (IBDCs) की स्थापना, मधुमक्खी के बक्सों, यंत्र आदि बनाने के केंद्र, कस्टम हायरिंग सेंटर, एपी-थैरेपी केंद्र, मधुमक्खी रोग निदान व रोकथाम प्रयोगशालाएं, हनी टेस्टिंग प्रयोगशालाएँ, क्वालिटी नुक्लियस स्टॉक व बी ब्रीडिंग सेंटर्स, कलेक्शन प्रोसेसिंग स्टोरेज केंद्रों आदि की स्थापना व डिजिटलीकरण/ ऑनलाइन पंजीकरण तथा मधुमक्खीपालन  से संबंधित अनुसंधान आदि पर अनुदान दिया जाएगा।

श्री तोमर ने अंत में कहा कि 5 साल में शहद उत्पादन 1,82,000 मीट्रिक टन, मधुमक्खी कालोनियों की संख्या- 45 लाख, शहद निर्यात 90,000 मीट्रिक टन और 5 लाख रोजगार पैदा करने के लक्ष्य हैं।

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