पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी के बीच मतभेद की ख़बरें हैं. कोलकाता से प्रकाशित अंग्रेज़ी दैनिक द टेलीग्राफ ने इस ख़बर को प्रमुखता से जगह दी है.
तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी पार्टी का राष्ट्रीय महसचिव पद छोड़ना चाहते हैं. लेकिन ममता बनर्जी कि उन्हें रोकना भी नहीं चाहती हैं. दोनों के बीच पिछले कई महीनों से टकराव की अटकलें लग रही हैं.।अभिषेक बनर्जी को ममता बनर्जी के बाद पार्टी में दूसरे नंबर का नेता माना जाता है. पश्चिम बंगाल चुनाव के दौरान भी उनकी पार्टी में बड़ी भूमिका नज़र आई थी.
अख़बार ने सूत्रों के हवाले से लिखा है, ”सोमवार को गोवा के चुनाव के बाद अभिषेक बनर्जी ने पद से हटने की इच्छा ज़ाहिर की है और वो सिर्फ़ डायमंड हार्बर से एक सांसद बने रहना चाहते हैं… दीदी को लगता है कि ये केवल ब्लैकमेल करने का एक तरीक़ा है. फ़िलहाल, उनकी अभिषेक को रोकने की कोई इच्छा नहीं है.”
अभिषेक बनर्जी को पार्टी में ममता बनर्जी का उत्तराधिकारी भी माना जाता है. इसे लेकर दूसरे सूत्र ने कहा, ”उन्हें लगता है कि किसी के राजनीतिक करियर या महत्वाकांक्षाओं को जगह देना उनकी जिम्मेदारी नहीं है.”
सूत्र के अनुसार, ”दीदी कुछ हालिया घटनाओं को लेकर अभिषेक और आई-पैक (चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर से जुड़ी कंपनी) से बहुत नाराज़ हैं… वह पार्टी के संगठन की कमान संभालना चाहती हैं और कल वरिष्ठ नेताओं की एक संचालन समिति की घोषणा कर सकती हैं.”
सूत्रों ने बताया कि ममता बनर्जी दो फ़रवरी को सर्वसम्मति से पार्टी की अध्यक्ष चुनी गई थीं. वह निकाय चुनावों के बाद कुछ संगठनात्मक बदलाव करने की योजना बना रही थीं.
सूत्र के मुताबिक, ”इन हालात में तुंरत उनके दखल की ज़रूरत है… इसलिए कल चुनाव के बावजूद भी वो बैठक कर रही हैं.”
कैसे हुआ टकराव
अभिषेक बनर्जी ‘एक व्यक्ति, एक पद’ का नीति पर ज़ोर दे रहे थे. शुक्रवार को फिरहाद हाकिम ने प्रेस वार्ता कर ये जानकारी दी कि पार्टी प्रमुख इस नीति का समर्थन नहीं करती हैं.
उन्होंने कहा, ”जो भी इसके लिए (सोशल मीडिया) अभियान में हिस्सा ले रहे हैं, उन्हें पता होना चाहिए कि सोशल मीडिया पर उनकी पोस्ट को पार्टी ने अनुमति नहीं दी है और पार्टी प्रमुख भी उसे स्वीकार नहीं करती हैं. ये पोस्ट हटानी चाहिए.”
फिरहाद हाकिम का इशारा उन सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर था जो तृणमूल कांग्रेस के छात्र ईकाई के नेताओं देबांगशु भट्टाचार्य, सुदीप राहा और त्रिनानकुर भट्टाचार्य ने की थीं. इन नेताओं की अभिषेक बनर्जी के साथ नज़दीकी बताई जाती है.
अभिषेक के चचेरे भाई-बहनों आकाश बनर्जी, अगनीशा बनर्जी और अदिती गयेन ने भी सोशल मीडिया पर यही मांग की थी. हालांकि, इनकी अभिषेक बनर्जी से नज़दीकी होने की बात सामने नहीं आई है.
सूत्र ने कहा, ”दीदी ने ये साफ़ कर दिया है कि उनका कोई परिवार नहीं है. उनका मानना है कि बंगाल के लोग ही उनका परिवार हैं.”
”एक व्यक्ति, एक पद की नीति को पिछले साल पाँच जून को एक उच्च स्तरीय बैठक में अपनाया गया था लेकिन दीदी ने ये साफ़ किया था कि वो चरणबद्ध तरीक़े से लागू होगी. इसके अलावा बार-बार इस नीति की मांग को पार्टी के वरिष्ठ नेता दीदी को चुनौती देने के तौर पर देख रहे हैं.”